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उत्तराखंड

खटीमा-मसूरी गोलीकांड के शहीदों की वजह से ही अलग राज्य बन सका उत्तराखंडः त्रिवेंद्र सिंह रावत

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने खटीमा एवं मसूरी गोली कांड के शहीदों को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए उनका भावपूर्ण स्मरण किया है।

2 सितम्बर 1994 को हुए मसूरी गोलीकांड के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि। हमारे वीर-वीरांगनाओं के बलिदान का स्मरण रखते हुए हम उनके सपनों का उत्तराखंड बनाने को तत्पर हैं। गांव, गरीब किसान खेत खलिहान हमारी नीतियों के केंद्र में हैं।

उन्होंने कहा कि शहीद आन्दोलनकारियों के बलिदान से ही आज उत्तराखण्ड को एक पृथक राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले राज्य आन्दोलकारियों के बलिदान को प्रदेश हमेशा याद रखेगा। राज्य सरकार शहीद आन्दोलनकारियों के सपनों के अनुरूप समृद्ध और प्रगतिशील उत्तराखंड बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन दुनिया के अन्य आन्दोलनों से अलग रहा है। इस आन्दोलन में मातृशक्ति एवं सैनिक पृष्ठभूमि की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। राज्य के विकास को और अधिक गति प्रदान करने के लिये हमें पलायन को रोकने, रोजगार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है।

 

उत्तराखंड

आध्यात्म : भगवान श्रीराम का देवभूमि उत्तराखण्ड से है गहरा नाता

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भगवान श्रीराम का मंदिर भव्य मंदिर भले ही अयोध्या में बनाने जा रहा है, लेकिन भगवान श्रीराम का देवभूमि उत्तराखण्ड से गहरा नाता रहा है।

यहां श्रीराम भागीाथी और अलंकनंदा के संगम यानि गंगा के उदगम स्थल देवप्रयाग में भी बसते हैं, जहां उनका भव्य मंदिर भी है।

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रामलला और रावण का बीच हुए युद्ध में जब राम ने रावण का वध किया तो उन पर ब्रहमा हत्या लग गयी, जिसके पाप से निवाराण पाने के लिये श्रीराम उस वक्त तप करने इस क्षेत्र में आये थे। जहां उन्होने सालो तक इस क्षेत्र में भी तपस्या की और तभी इस क्षेत्र को भगवान श्रीराम की तपस्थली भी कहा जाता है।

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