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प्रादेशिक

दलित छात्रों को अलग बैठाकर भोजन कराने पर भड़कीं मायावती, सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग

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लखनऊ। यूपी के बलिया जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठकार भोजन कराने पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सख्त नाराजगी जताई है।

मायावती ने इसपर राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार को मायावती ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, “यूपी के बलिया जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठाकर भोजन कराने की खबर अति-दु:खद व अति-निंदनीय।”

उन्होंने कहा, “बसपा की मांग है कि ऐसे घिनौने जातिवादी भेदभाव के दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे, ताकि दूसरों को इससे सबक मिले व इसकी पुनरावृति न हो।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड डे मील के दौरान बच्चों को नमक-रोटी परोसने के मामले के बाद, बलिया में कुछ बच्चों को पत्तल पर भोजन देने की बात सामने आई थी।

इन बातों को लेकर हो रहे हंगामे के बीच अब बलिया में ही कुछ बच्चों के अलग बैठकर घर से लाई गई थालियों में मिड डे मील खाने का मामला सामने आया है।

इस मामले में स्कूल के प्रधानाचार्य पी गुप्ता ने कहा, “हम बच्चों को बहुत समझाते हैं कि सभी लोग एक साथ बैठकर ही भोजन करें। लेकिन हमारे हटते ही बच्चे अलग-अलग हो जाते हैं। हम छात्रों को समझाने का प्रयास कर रहें हैं।”

नेशनल

राम मंदिर हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा: पीएम मोदी

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अयोध्या। अयोध्या में आज राम मंदिर भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी ने देश की जनता को संबोधित किया। पीएम मोदी ने भाषण की शुरुआत सियावर रामचंद्र की जय से की. उन्होने कहा कि आज ये जयघोष सिर्फ सियाराम की नगरी में नहीं सुनाई दे रहा, बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्वभर में सुनाई दे रही है. सभी देशवासियों और राम भक्तों को कोटि-कोटि बधाई. ये मेरा सौभाग्य है कि राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट ने मुझे आमंत्रित किया और इस पल का साक्षी बनने का अवसर दिया. राम मंदिर पूजन के लिए कई सदियों तक कई पीढ़ियों ने एकनिष्ठ प्रयास किया. आज का दिन उसी तप और त्याग और संकल्प का प्रतीक है.

पीएम मोदी ने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था दर्पण भी था. संघर्ष भी था और संकल्प भी था. जिनकी तपस्या राम मंदिर की नींव में जुड़ी हुई है उनके लिए मैं सिर झुकाकर नमन करता हूं. उनका अभिनंदन करता हूं. क्या कुछ नहीं हुआ हमारा संकल्प मिटाने के लिए, लेकिन राम हमारे मन में हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं. राम के सब काम हनुमान ही तो करते हैं, कलियुग में भी राम के मंदिर की जिम्मेदारी उन पर है. पीएम ने कहा कि सालों से टेंट में रहे आज हमारे रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है.

500 वर्षों के लंबे संघर्ष के उपरांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया गया और ये गर्व का विषय है कि समाज के सभी वर्गों ने इस निर्णय को सहर्ष स्वीकारा. श्री राम जी की सिखायी मर्यादा का अनुसरण कर सम्पूर्ण देश ने अनूठी मिसाल दिखाई. हमें ये भी सुनिश्चित करना है कि भगवान श्रीराम का संदेश, राममंदिर का संदेश, हमारी हजारों सालों की परंपरा का संदेश, कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुंचे. कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन-दृष्टि से विश्व परिचित हो, ये हमारी, हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की ज़िम्मेदारी है

पीएम बोले-राम मंदिर हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा, करोड़ों लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का प्रतीक बनेगा. ये मंदिर आने वाली पीढ़ियों को संकल्प का संदेश देता रहेगा. यहां सिर्फ मंदिर ही नहीं बनेगा, बल्कि पूरी अयोध्या का आर्थिक विकास होगा. पूरी दुनिया के लोग यहां आएंगे. पूरी दुनिया के लोग माता जानकी के दर्शन करने यहां आएंगे. राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है. नर को नारायण से और लोक को आस्था से जोड़ने का का काम है राम मंदिर निर्माण.

पीएम मोदी बोले कोरोनावायरस से बनी हुई स्थिति के कारण ये कार्यक्रम मर्यादा के बीच हो रहा है. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए जिस मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए वैसा ही आज किया जा रहा है. आज भी हम हर तरफ कोरोनावायरस के दौरान अपनाई गई मर्यादा देख रहे हैं. इतिहास सिर्फ रचा नहीं जा रहा, बल्कि इतिहास दोहराया भी जा रहा है. जिस तरह केवट, वानरों को राम के ध्येय को पूरा करने का सौभाग्य मिला उसी तरह आज करोड़ों लोगों को ये सौभाग्य प्राप्त हो रहा है.

पीएम ने कहा कि हम जानते हैं कि जिस तरह पत्थरों पर श्रीराम लिखकर राम सेतु बनाया गया, उसी तरह घर-घर से पूजी शिलाएं यहां पूजा स्रोत बनीं. देश की कई नदियों से लाया गया जल यहां के लिए महत्वपूर्ण बनी. सहयोग की शक्ति आज पूरी दुनिया के लिए शोध का विषय बन गई है. श्रीराम इसलिए भारत के लिए प्रकाश स्तंभ बने हुए क्योंकि उन्होंने सामाजिक समरसता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया.

राम प्रजा से एक समान प्रेम करते हैं, लेकिन दुखियों और गरीबों पर उनकी विशेष कृपा रहती है. देश की विभिन्नता में एकता का संदेश राम देते हैं. देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं में आपको रामायण मिलेगी. अलग-अलग रामायणों में अलग-अलग जगहों पर भिन्न भिन्न स्वरूपों में राम हैं. यानि राम सब जगह हैं, सबके राम हैं. दुनिया के कई देशों में राम को मानने वाले लोग हैं.

विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम जनसंख्या इंडोनेशिया में है. वहां भी कई अनूठी रामायण हैं, राम आज भी वहां पूजनीय है. ईरान और चीन में भी राम कथा का विवरण हैं, नेपाल का रामायण से संबंध माता जानकी से जुड़ा हुआ है. दुनिया के कई देशों में किसी न किसी रूप में राम रचे बसे हैं. आज इन देशों के लोगों को राम मंदिर निर्माण का काम शुरू होने से सुखद अनुभूति हो रही होगी. शास्त्र कहते हैं कि राम जैसा शासक इस दुनिया में कभी हुआ ही नहीं.

पीएम मोदी बोले- श्रीराम ने कहा कि अपनी शरण में आए हर किसी की रक्षा करनी चाहिए. ये भी श्रीराम की नीति है कि हमारा देश जितना देश ताकतवर होगा शांति बनी रहेगी. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इन्हीं सूत्रों और नियमों के तहत रामराज्य का सपना देखा था. राम समय काल और परिस्थितियों के हिसाब से काम करते हैं.

वो हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, उनके हिसाब से चलना सिखाते हैं. उनकी प्रेरणा और आदर्शों के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है. श्रीराम ने विरोध से निकलकर बोध और शोध का मार्ग दिखाया है. हमें उनके नियमों के मुताबिक राम मंदिर की शिलाओं को जोड़ना है. हमें सबकी भावनाओं का ध्यान रखना है, हमें सबके विश्वास से सबका विकास करना है. हमें एक आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है.

आज की मर्यादा है दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी- सभी के स्वास्थ्य की शुभकामनाओं के साथ देश के सभी नागरिकों को कोटि-कोटि प्रणाम. मेरे साथ-साथ बोलिए सियापति रामचंद्र की जय.

#pmmodi #ayodhya #rammandir

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