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अरुण जेटली के निधन पर अमित शाह ने जताया दुख, कहा-ये मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है

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नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 12 बजकर 5 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

जेटली के निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं समेत देशभर में शोक की लहर है। उनके निधन पर भाजपा के साथ ही विपक्षी दलों के नेताओं ने गहरा शोक जताया है।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी जेटली के निधन पर दुख जताया है। शाह ने ट्विटर पर जताते हुए कहा कि अरुण जेटली के निधन से अत्यंत दुःखी हूं। जेटली का जाना मेरे लिये एक व्यक्तिगत क्षति है।

उन्होंने कहा कि उनके रूप में मैंने न सिर्फ संगठन का एक वरिष्ठ नेता खोया है बल्कि परिवार का एक ऐसा अभिन्न सदस्य भी खोया है जिनका साथ और मार्गदर्शन मुझे वर्षों तक प्राप्त होता रहा।

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फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद..

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नई दिल्ली। निर्भया के गुनहगारों को भी अब अपनी मौत का डर सताने लगा है। खबर है कि निर्भया के चारों गुनहगारों को इसी महीने फांसी दी जा सकती है। अब तिहाड़ जेल प्रशासन को राष्ट्रपति के पास भेजी गयी दोषी विनय शर्मा की दया याचिका के खारिज होने का इंतजार है। जेल अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजे जाने के बाद से ही जेल में दोषी की फांसी की तैयारी शुरू कर दी जाती है।

आपको बता दें कि किसी को फांसी देते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। जिसके बिना फांसी की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है। फांसी की सजा फाइनल होने के बाद डेथ वारंट का इंतजार होता है। दया याचिका खारिज होने के बाद ये वारंट कभी भी आ सकता है। वॉरंट में फांसी की तारीख और समय लिखा होता है। डेथ वॉरंट जारी होने के बाद कैदी को बताया जाता है कि उसे फांसी होने वाली है। उसके बाद कैदी के परिवार को फांसी से 10-15 दिन पहले सूचना दे दी जाती है ताकि आखिरी बार परिवार के लोग कैदी से मिल सकें। जेल में कैदी की पूरी चेकिंग होती है। उसे बाकी कैदियों से अलग सेल में रखा जाता है।

आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि फांसी के वक्‍त मुजरिम के साथ जल्‍लाद के अलावा तीन अधिकारी होते हैं जिनमें जेल सुप्रीटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर और मजिस्ट्रेट शामिल हैं। लेकिन फांसी के फंदे तक ले जाने का काम जल्‍लाद का है और मौत से ठीक पहले आखिरी वक्‍त में वो ही मुजरिम के पास होता है। बता दें कि इस पूरे नियम-कानून के बीच सबसे बड़ा और सबसे मुश्किल काम जल्लाद का ही होता है। फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कानों में कुछ बोलता है जिसके बाद वह चबूतरे से जुड़ा लीवर खींच देता हैं। अगर अपराधी हिंदू है तो जल्‍लाद उसके कान में राम-राम कहता है और अगर मुस्‍लिम है तो सलाम। उसके बाद वो कहता है मैं अपने फर्ज के आगे मजबूर हूं, मैं आपके सत्य की राह पर चलने की कामना करता हूं।

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