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महिला को डायन बताकर ग्रामीणों ने जबरन खिलाया मानव मल, इससे भी मन नहीं भरा तो….

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नई दिल्ली। नेपाल के महोत्तरी जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के बिरता गांव में गांववालों ने एक 35 वर्षीय महिला को डायन बताकर कथित तौर पर उसे पीटा और मानव मल खाने पर मजबूर किया।

पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।  इस मामले में पुलिस अधीक्षक श्याम कृष्ण अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की पहचान सबिता देवी, पोशिला धनुवार, इंद्रा देवी सिंह धनुवार, सुकेश्वरी देवी और राजश्री अनुवर के रूप में की गई है।

उन्होंने बताया कि सुकेश्वरी और राजश्री को पुलिस हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि नेपाल के कुछ हिस्सों में महिलाओं को डायन बताकर उनकी पिटाई और हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, देश में पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ हिस्सों में भी डायन प्रथा की घटनाएं सामने आती रही हैं।

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करतारपुर पर पाक सेना ने पलटा इमरान खान का फैसला, चली ये चाल

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नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। पाकिस्तानी सेना ने पाक पीएम इमरान खान के उस फैसले को बदल दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। पाक सेना ने प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यक्ता होगी।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।

गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।

उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।

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