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वाईफाई पासवर्ड चेंज होने पर भड़का शख्स, बहन के साथ किया घिनौना काम

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नई दिल्ली। 18 साल के एक लड़के को बहन की हत्या का दोषी पाए जाने के बाद अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला अमेरिका के जार्जिया का है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2 साल पहले वाईफाई पासवर्ड को लेकर हुए झगड़े में छोटे भाई ने अपनी बहन को मौत के घाट उतार दिया था।

केवन वाटकिन्स ने अपनी बहन का गला दबाकर अपनी बहन की हत्या कर दी थी। घटना के बाद निचली अदालत में दो साल इस केस पर सुनवाई हुई जिसके बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दे दिया।

जानकारी के मुताबिक इंटरनेट स्पीड स्लो होने की वजह शख्स का झगड़ा उसकी मां से हो रहा था इस बीच बहन बीचबचाव में आ गई जिसके बाद लड़के को इतना गुस्सा आ गया कि उसने अपनी बहन का गला दबाकर हत्या कर दी। घटना के वक्त बहन की सगाई हो चुकी थी और उनका एक बेटा भी था। घटना के वक्त भाई की उम्र सिर्फ 16 साल थी।

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कोरोना का अंत आया करीब, कोविड-19 को इस खतरनाक वायरस से मारेंगे वैज्ञानिक

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस (कोविड-19) से दुनियाभर में अबतक 83 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 14 लाख के पार हो गई है। इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर आशा की किरण नजर आने लगी है।

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ताजा शोध में पाया गया है कि मर्स वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। चूहे पर किए गए इस वैक्सीन के परीक्षण में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक एक चूहे को मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) की हैवी डोज दी गई थी उससे कोरोना वायरस से निजात मिलने की आशा नजर आ रही है। बता दें कि मर्स कोरोना वायरस कोविड-19 से काफी मिलता जुलता है, जिसने इस समय पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ताओं ने दावा किया यह वैक्सीन कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए एक हानिकारक वायरस का इस्तेमाल करता है। इसके परीक्षण के बाद कोविड-19 समेत अन्य कोरोना वायरस बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने उम्मीद जगती है।

जर्नल एमबायो में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह वैक्सीन एक पैराइंफ्लूएंजा वायरस (पीआई5) है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन होता है, जो मर्स कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए इस्तेमाल करता है। मर्स की घातक डोज देने के बावजूद जब चूहे पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया तो उसे कुछ नहीं हुआ।

यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ता प्रोफेसर पॉल मैक्क्रे ने कहा, हमारा नया अध्ययन दर्शाता है कि पैराइंफ्लूएंजा वायरस को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उपयोगी वैक्सीन साबित हो सकती है। शोधकर्ता अब जानवरों पर पैराइंफ्लूएंजा वायरस आधारित वैक्सीन के ज्यादा इस्तेमाल कर अध्ययन की योजना बना रहे हैं क्योंकि मर्स और कोविड-19 दोनों ही कोरोना वायरस के कारण फैला है।

मर्स ज्यादा घातक है, लेकिन 2012 से यह वायरस फैलने के बाद से अब तक केवल 2,494 मामले सामने आए हैं। वहीं, वुहान में पिछले साल दिसंबर में फैले कोविड-19 वायरस से दुनियाभर में अब तक 70 हजार लोग मारे जा चुके हैं।

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