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भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ ये खतरनाक हेलीकॉप्टर, जानकर पाकिस्तान के उड़ जाएंगे होश

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नई दिल्ली। हवाई क्षेत्र में भारत की ताकत अब और ज्यादा बढ़ गई है। भारतीय वायुसेना में बेहद खतरनाक माने जाने वाले एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर शामिल हो गया है।

शनिवार को इस हेलीकॉप्टर की पहली खेप भारत पहुंच गई जिसे वायुसेना में शामिल करने के लिए हिंडन एयरबेस से पठानकोट एयरबेस भेजा गया है। ये हेलिकॉप्टर वायुसेना में एमआई-35 हेलिकॉप्टरों की जगह लेंगे।

आपको बता दें कि भारत ने अमेरिका के साथ 22 अपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने का करार किया है। इससे पहले अमेरिका के एरिजोना स्थित प्रोडक्शन फैसिलिटी सेंटर में भारतीय वायुसेना को पहला अपाचे हेलिकॉप्टर मिला था।

यह मल्टी रोल फाइटर हेलिकॉप्टर है, जो करीब 300 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड से उड़ सकता है। अपाचे हेलिकॉप्टर में दो हाई परफॉर्मेंस इंजन लगे हुए हैं।

अपाचे हेलिकॉप्टर को लेजर, इन्फ्रारेड और अन्य नाइट विजन सिस्टम से लैस किया गया है। यह हेलिकॉप्टर अंधेरे में भी दुश्मनों को निशाना करके हमला कर सकता है।

इतना ही नहीं, अपाचे हेलिकॉप्टर की मदद से अत्याधुनिक मिसाइलों को भी दागा जा सकता है। इसके साथ ही कई तरह के गोला और बारूद को भी गिराया जा सकता है।

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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