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लड़की ने की ऐसी हरकत, हाथी ने जड़ा जोरदार थप्पड़, वीडियो हुआ वायरल

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नई दिल्ली। इंसान हो या जानवर बुरा सबको लगता है मूड सबका खराब होता है। ऐसे ही बुरा एक हाथी को उस समय लग गया जब कुछ महिलाएं उसकी तस्वीरें खींच रही थी।

फोटो खींचने से हाथी भड़क गया और उसने एक महिला को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। सोशल मीडिया पर हाथी के थप्पड़ का ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग एक हाथी की फोटो खींच रहे हैं तभी हाथी अचानक गुस्से में आ जाता है और महिला को करारा थप्पड़ जड़ देता है।

थप्पड़ से महिला वहीं गिर जाती है और उसका मोबाइल भी हाथ से छूट जाता है। इस विडियो को Ernie Ley नाम के ट्विटर यूजर ने शेयर किया है।

इस वायरल वीडियो को करोड़ो लोग देख चुके हैं। हाथी का थप्प़ड़ कई लोगों को पसंद आ रहा है तो वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग लड़की को बचाने के लिए सरकारी वकील बन चुके हैं। हालांकि ये वारयल वीडियो कहां का है फिलहाल इस बात का पता नहीं चल सका है।

 

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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