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ऑफ़बीट

ये तस्वीर समुद्र के किनारे की नहीं, सच्चाई जानकर हंसी रोक नहीं पाएंगे आप

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर इन दिनों वायरल हो रही है जिसे देखकर पहली बार में हर कोई धोखा खा जा रहा है। Optical Illusion (दृष्टि-भ्रम) वाली ये तस्वीर आजकल लोगों के दिमाग को चकरा दे रही है।

हाल ही में एक ट्विटर यूजर ने एक तस्वीर शेयर की जो देखने में बिल्कुल किसी समुद्र के किनारे की लग रही है लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है।

दरअसल, ये किसी बीच की तस्वीर नहीं बल्कि एक कार के टूटे हुए दरवाजे का हिस्सा है। इस तस्वीर को देखने के बाद हर कोई पहली बार में धोखा खा जा रहा है।

इस फोटो को ट्वीट करते हुए एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, “अगर आपको बीच, समुद्री आसमान, चट्टानें और तारे दिखाई दे रहे हैं तो आप एक कलाकार हैं, लेकिन यह कोई पेंटिंग नहीं है। यह कार के दरवाजे का निचला हिस्सा है जिसकी मरम्मत करानी है। जिसके बाद ट्विटर पर लोग इस तस्वीर को लेकर खूब मजाक कर रहे…

 

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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