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शादी करने वाले जोड़ों को मोदी सरकार दे रही है 2.5 लाख रुपए, ऐसे पाएं योजना का लाभ

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नई दिल्ली। सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए मोदी सरकार अंतरजातीय विवाह करने वालों के लिए शानदार स्कीम चला रही है।

इस स्कीम के तहत अगर कोई दलित से शादी करता है तो उस नवदंपत्ति को सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपए मिलेंगे। नवदंपत्ति को यह आर्थिक मदद डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज के तहत दी जाती है।

योजना की शुरुआत यूपीए की सरकार के समय साल 2013 में हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस योजना को शुरू किया जो मोदी सरकार के समय भी जारी है। इस योजना का लाभ पाने के लिए कुछ शर्ते तय की गई हैं जिसके बाद ही आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

  1. नवदंपति अपने क्षेत्र के मौजूदा सांसद या विधायक की सिफारिश के साथ आवेदन को पूरा करके सीधे डॉ अंबेडकर फाउंडेशन को भेज सकते हैं.
  2. नवदंपति आवेदन को पूरा भरकर राज्य सरकार या जिला प्रशासन को सौंप सकते हैं. इसके बाद राज्य सरकार या जिला प्रशासन आवेदन को सिफारिश के साथ डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को भेज देते हैं.

किनको मिलेगा फायदा

  1. नवदंपति में से कोई एक दलित समुदाय से होना चाहिए, जबकि दूसरा दलित समुदाय से बाहर का होना चाहिए.
  2. शादी को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत रजिस्टर होना चाहिए. इस संबंध में नवदंपति को एक हलफनामा दाखिल करना होगा.
  3. इस स्कीम का फायदा उन्हीं नवदंपति को मिलेगा, जिन्होंने पहली बार शादी की है. दूसरी शादी करने वालों को इसका फायदा नहीं मिलेगा.
  4. आवेदन पूरा करके शादी के एक साल के अंदर डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को भेजना होगा.
  5. अगर नवदंपति को राज्य या केंद्र सरकार द्वारा किसी तरह की आर्थिक सहायता पहले मिल चुकी है, तो उसको इस ढाई लाख रुपये की धनराशि में घटा दी जाएगी.

आवेदन के साथ लगाएं ये दस्तावेज

  1. नवदंपति में से जो भी दलित यानी अनुसूचित जाति समुदाय से हो, उसका जाति प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लगाना होगा.
  2. हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत शादी रजिस्टर करने के बाद जारी मैरिज सर्टिफिकेट भी संलग्न करना होगा.
  3. आवेदन के साथ कानूनी रूप से विवाहित होने का हलफनामा देना होगा.
  4. आवेदन के साथ ऐसा दस्तावेज भी लगाना होगा, जिससे यह साबित हो कि दोनों की यह पहली शादी है.
  5. नवविवाहित पति-पत्नी का आय प्रमाण पत्र भी देना होगा.
  6. नवदंपति का संयुक्त बैंक खाते की जानकारी देनी होगी.

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वेंटिलेटर पर अरुण जेटली, हालत बेहद नाजुक

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नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की हालत नाजुक बनी हुई है। शनिवार की तरह ही रविवार को भी उन्हें देखने के लिए नेताओं का एम्स में तांता लगा रहा।

आपको बता दें कि अरुण जेटली लंबे समय से एम्स में भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जेटली के फेफड़े में पानी भर जा रहा है। तमाम इलाज और डॉक्टर्स की मेहनत के बाद भी जेटली जी की सेहत में कोई खास सुधार नहीं हो पा रहा है बल्कि उनकी हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।

जेटली भाजपा सरकार के दिग्गज नेताओं में गिने जाते है। 2014 में जब देश में मोदी सरकार बनी तब जेटली केंद्रीय वित्त मंत्री बनाए गए और उनका कार्यकाल काफी सफल माना गया। खराब सेहत के चलते वह 2019 का चुनाव नहीं लड़ पाए। हालांकि पार्टी ने उनकी कमी ज़रुर महसूस की।

इस वक्त उनके खराब सेहत के चलते उन्हें एम्स में लाइफ स्पोर्टिंग सिस्टम पर रखा गया है। इस वक्त जेटली जी को दवा के साथ-साथ दुआ की भी खास ज़रुरत है। देश में उनके स्वस्थ होने की लोग ऊपर वाले से दुआ मांग रहे है तो कुछ लोग उनकी सलामती के लिए हवन कर रहे है। राजनेताओं की बात करें तो एम्स में अरुण जेटली से मुलाकात करने के लिए पक्ष-विपक्ष के नेताओं का आना-जाना लगातार लगा हुआ है।

शनिवार को अरुण जेटली का हाल जानने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एम्स पहुंचकर अरुण जेटली का हाल जाना, और इसी के साथ ही अरुण जेटली की हालत पर डॉक्टरों से बातचीत भी की।

इन लोगों के अलावा शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती और बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार भी जेटली से मिलने एम्स पहुँचे। इससे पहले जब अरुण जेटली 9 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुए थे तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और बीजेपी के अन्य कई नेता उनको देखने एम्स पहुंचे थे।

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