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भारत में बनने जा रहा नया कानून, अब एक दिन में सिर्फ 70 लीटर पानी खर्च कर सकेंगे आप

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जयपुर। जल संकट को देखते हुए राजस्थान सरकार नया कानून बनाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के मुताबिक जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना 70 लीटर पानी ही खर्च कर सकेगा।

 

 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जो भी इस नए कानून का उल्लघंन करेगा उसे डेढ़ साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना भरना होगा। जल संसाधन विभाग (डब्लूआरडी) के एक अधिकारी ने बताया कि राजस्थान जल बिल का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और अभी विचाराधीन है।

विधानसभा में पेश होने से पहले विधेयक जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास जाएगा। बता दें कि अगर ये कानून लागू हो जाता है तो पानी पर ऐसा कानून बनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन जाएगा।

ड्राफ्ट बिल के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को एक स्वस्थ और गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए बुनियादी पानी उपलब्ध कराने का मौलिक अधिकार है और किसी भी स्थिति में भूजल या सतही जल के लिए बुनियादी पानी की मात्रा 70 लीटर प्रति व्यक्ति से कम नहीं होगी। कानून ये भी सुनिश्चित करेगा कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार लोगों को गुणवत्तापूर्ण जल मिले।

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, कानून के तहत प्रत्येक ब्लॉक और नगरपालिका में एक शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति भी की जाएगी। जहां लोग पानी की कमी की शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। शिकायत निवारण अधिकारी की सहायता के लिए हर जिले में एक ‘न्याय मित्र’ होगा।

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रेलवे में ख़त्म होगा खलासी सिस्टम, नहीं होंगी नई भर्तियां

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना संजोए हुए हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। दरअसल रेलवे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करने वाले ‘बंगला पियुन’ या खलासियों की नियुक्ति की औपनिवेशिक काल की प्रणाली को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है और इस पद पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी किया।

रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी (TADK) संबंधी मामले की समीक्षा की जा रही है. आदेश में कहा गया है, ‘टीएडीके की नियुक्ति संबंधी मामला रेलवे बोर्ड में समीक्षाधीन है इसलिए यह फैसला किया गया है कि टीएडीके के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और न ही तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, एक जुलाई 2020 से इस प्रकार की नियुक्तियों को दी गई मंजूरी के मामलों की समीक्षा की जा सकती है और इसकी स्थिति बोर्ड को बताई जाएगी। इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए।

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