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आध्यात्म

भगवान शिव के पास कैसे आई तीसरी आंख, जानकर रह जाएंगे हैरान

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नई दिल्ली। भगवान शिव की तीन आखें हैं ये बात तो सभी को पता है लेकिन बहुत कम लोगों को ही ये जानकारी होगी कि उन्हें तीसरी आंख आखिर कैसे मिली।

आज हम आपको बताएंगे कि महादेव को तीसरी आंख कैसे प्राप्त हुई और इसकी वजह क्या थी। महाभारत के छठे खंड के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि आखिर शिवजी को तीसरी आंख कैसे मिली थी।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार नारद जी भगवान शिव और माता पार्वती के बीच हुए बातचीत को बताते हैं। इसी बातचीत में त्रिनेत्र का रहस्य छुपा हुआ है।

नारद जी बताते हैं कि एक बार हिमालय पर भगवान शिव एक सभा कर रहे थे, जिसमें सभी देवता, ऋषि-मुनि और ज्ञानीजन शामिल थे। तभी सभा में माता पार्वती आईं और उन्होंने अपने मनोरंजन के लिए अपने दोनों हाथों से भगवान शिव की दोनों आंखों को ढक दिया।

माता पार्वती ने जैसे ही भगवान शिव की आंखों को ढका, संसार में अंधेरा छा गया। ऐसा लगने लगा जैसे सूर्य देव का कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसके बाद धरती पर मौजूद सभी जीव-जंतुओं में खलबली मच गई।

संसार की ये हालत भोलेनाथ से देखी नहीं गई और उन्होंने तुरंत ही अपने माथे पर ज्योतिपुंज प्रकट किया। बाद में जब माता पार्वती ने इस बारे में पूछा था भगवान शिव ने बताया कि अगर वो ऐसा नहीं करते तो संसार का विनाश हो जाता क्योंकि उनकी आंखें ही जगत की पालनहार हैं।

आध्यात्म

गणेश चतुर्थीः इस शुभ मुहूर्त में करें मूर्ति स्थापना

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नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी आज यानी 2 सितम्बर धूमधाम से पूरे देश में मनाया जा रहा है। आज के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों को विशेष फल मिलता है। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त कब है।

गणेशजी की प्रतिमा को 2 सितंबर को विधि विधान से घर में स्थापित किया जाएगा। 9 दिनों तक विधिवत पूजा अर्चना के बाद 10 वें दिन यानि 12 सितंबर को मूर्ति विसर्जन कर दिया जाएगा।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म भादप्रद माह के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी को हुआ था। इस वर्ष यह दिन 2 सितंबर 2019 को पड़ रहा है। मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर का समय पूजा अर्चना के लिए बड़ा ही शुभ माना जाता है।

इस वर्ष 2 सितंबर गणेश चतुर्थी की पूजा की अवधि 2 घण्टे 32 मिनट तक रहेगी। गणेश पूजा का शुभ मुहर्त सुबह 11 :04 से दोपहर 13 :37 तक रहेगा।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना के बाद मूर्ति के सामने दिया जलाए। इसके बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं। ऐसा आप लगतार नौ दिन तक करें और 10वें दिन विधिपूर्वक गणपति जी की मूर्ति विसर्जित कर दें।

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