Connect with us

प्रादेशिक

योगी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, इन 17 जातियों को मिलेगा 15 फीसदी आरक्षण

Published

on

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपी में होने वाले उपचुनाव से पहले बड़ा एलान किया है। प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल कहार व कश्यप समेत 17 जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र देने का आदेश जारी किया है।

ये फैसला अदालत के उस आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम ,1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करके इसमें संशोधन किया है। इस फैसले के बाद सूबे के सभी जिलाधिकारियों को इन जातियों के परिवारों को प्रमाणपत्र दिये जाने का आदेश दिया जा चुका है। माना जा रहा है कि सीएम योगी के इस फैसले से बीजेपी को यूपी में होने वाले उपचुनाव में बड़ा फायदा मिल सकता है।

इन जातियों को मिलेगा आरक्षण

सरकार के इस फैसले से जिन 17 अति- पिछड़ी जातियों को ये फायदा पहुंचेगा वो हैं- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी व मछुआ।

 

प्रादेशिक

साक्षी मिश्रा ने बरेली में कराया शादी का रजिस्ट्रेशन, बन गई साक्षी नायक

Published

on

लखनऊ। पिछले महीने भागकर शादी करने और उसके बाद की घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहे साक्षी मिश्रा और अजितेश चुपचाप बरेली लौट आए और यहां अपने विवाह का पंजीकरण कराया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच बरेली लौटे दंपति रजिस्ट्रार कार्यालय गए और वहां उन्होंने अपनी शादी का पंजीकरण कराया। इस जोड़े ने पहले ही प्रयागराज के एक मंदिर में शादी कर ली थी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विवाह को वैध ठहराया गया था।

भाजपा विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा ने एक दलित लड़के अजितेश से तीन जुलाई को भागकर शादी कर ली थी। इस जोड़े ने बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने साक्षी के पिता और भाई से अपनी जान को खतरा होने का दावा किया था।

इस मामले ने बड़ा तूल तब पकड़ा जब यह दंपति नोएडा में एक टीवी स्टूडियो में दिखाई दिए गए, जहां उन्होंने जाति के कारण साक्षी के परिवार द्वारा शादी अस्वीकार करने का आरोप लगाया था। बाद में यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया, जिसने राज्य सरकार को दंपति को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया और उनकी शादी को वैध भी ठहराया।

इस जोड़े ने अपनी शादी के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जब वे अदालत में पेश हुए, तो सुरक्षाकर्मियों ने मीडिया को बाहर ही रोक दिया था। इस बीच साक्षी और उसके पति ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दावा किया था कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर लड़की के पिता और ससुराल वालों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

साक्षी के करीबी एक सूत्र ने बताया कि भले ही उनकी शादी को कोर्ट ने वैध ठहरा दिया हो, लेकिन वे ‘सभी संदेहों को दूर करने’ के लिए शादी का पंजीकरण कराना चाहते थे। पति-पत्नी दिल्ली लौट गए हैं।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending