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बड़े उम्मीदों के साथ इलाज के लिए एम्स गई थी छात्रा, डॉक्टर बोले-2025 में आना

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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

यहां अपने दोनों कानों का इलाज कराने आई एक छात्रा को 10 अक्टूबर 2025 को आकर ऑपरेशन कराने को कहा गया। छात्रा के मुताबिक एम्स के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ रेजीडेंट डॉक्टर ने छात्रा को 10 अक्तूबर 2025 को सुबह 9:00 बजे आने की सलाह दी है।

आपको बता दें कि एम्स में दिल के इलाज के लिए मरीजों को कई साल का इंतजार करना पड़ता है लेकिन अब कान के ऑपरेशन के लिए भी कई साल बाद का अप्वाइंटमेंट मिल रहा है। छात्रा का नाम निशा है।

निशा के दोनों कानों में छेद है। कई सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट अस्पताल दिखाने के बाद ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई। खर्च ज्यादा होने की वजह से वह एम्स में पहुंची, लेकिन यहां भी उसके हाथ मायूसी ही लगी।

लंबा नंबर लगने की वजह से डॉक्टर ने उसे 2025 में आकर इलाज कराने की सलाह दे दी। हालांकि इस मामले में एम्स प्रबंधन की ओर से कोई टिप्पणी नहीं मिली है, लेकिन बताया जा रहा है कि एम्स के ज्यादातर विभागों में लंबे समय से मरीजों का भार बढ़ता जा रहा है।

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सावरकर पर दिग्विजय सिंह ने दिया बड़ा बयान, कहा-हम उनका सम्मान करते हैं लेकिन….

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नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में वीर सावरकर एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘भारत बचाओ’ रैली में राहुल गांधी के सावरकर पर की गई टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक उथल पुथल देखने को मिल रही है।

जहां एक ओर शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राहुल गांधी के इस बयान के बाद उन पर लगातार निशाना साध रहे हैं वहीं कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के बचाव में उतर आई है। इस बीच दिग्विजय सिंह ने भी सावरकर को लेकर बड़ा बयान दिया है।

एक टीवी चैनल से की गई खास बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम सावरकर का सम्मान करते हैं। बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा, मैं इतना ही कह सकता हूं कि दामोदर राव सावरकर के जीवन के दो पहलू हैं। एक वो है जब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए उन्हें सज़ा हुई और कालापानी भेजा गया।

दिग्विजय सिंह ने कहा, सावरकर के जीवन का दूसरा पहलू माफी लिखकर जेल से निकलने का है। माफी मांग कर जेल से निकलने के बाद उन्होंने अपने पूरे समय पूरे देश में ब्रिटिश हुकूमत की बांटो और राज करो की नीति को ही आगे बढ़ाया। इसलिए दोनों ही पहलू उनके जीवन में रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘मैं कहता हूं, जो भी व्यक्ति देश के लिए लड़ा है, हम उसका सम्मान तो करते हैं, लेकिन माफी मांगना एक अलग इतिहास है।’

 

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