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लखनऊ: इंदिरा नहर में गिरी यात्रियों से भरी पिकअप, सात बच्चे लापता

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार देर रात 29 सवारियों से भरा एक पिकअप वाहन इंदिरा नहर में जा गिरा। इस हादसे में 22 लोगों को किसी तरह सही सलामत बाहर निकाल लिया गया लेकिन सात बच्चे अभी भी लापता हैं।

आईजी रेंज लखनऊ एस के भगत ने बताया, “बुधवार रात करीब दो बजे 29 लोग पिकअप में सवार होकर नगराम से एक शादी समारोह से लौट रहे थे। नहर के पास एक पतली पगडंडी पर पिकअप फंस गया। जिसके बाद ड्राईवर ने वाहन को बायीं ओर मोड़ना चाहा, लेकिन जगह न होने की वजह से पिकअप इंदिरा नहर में जा गिरा।”

उन्होंने बताया, “लोगों ने किसी तरह से एक-दूसरे को खींचकर नहर से बाहर निकाला। देर रात क्रेन की मदद से पिकअप को बाहर निकाला गया जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।” उन्होंने बताया, “अब तक 22 लोगों को बचाया जा चुका है, सात बच्चे अभी भी लापता हैं। बचाव अभियान जारी है।”

घटना के बाद सुबह चार बजे से एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन बच्चों का पता नहीं लग पाया। वहीं, मौके पर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह और एसएसपी कलानिधि नैथानी भी मौजूद हैं।

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साक्षी मिश्रा ने बरेली में कराया शादी का रजिस्ट्रेशन, बन गई साक्षी नायक

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लखनऊ। पिछले महीने भागकर शादी करने और उसके बाद की घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहे साक्षी मिश्रा और अजितेश चुपचाप बरेली लौट आए और यहां अपने विवाह का पंजीकरण कराया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच बरेली लौटे दंपति रजिस्ट्रार कार्यालय गए और वहां उन्होंने अपनी शादी का पंजीकरण कराया। इस जोड़े ने पहले ही प्रयागराज के एक मंदिर में शादी कर ली थी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विवाह को वैध ठहराया गया था।

भाजपा विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा ने एक दलित लड़के अजितेश से तीन जुलाई को भागकर शादी कर ली थी। इस जोड़े ने बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने साक्षी के पिता और भाई से अपनी जान को खतरा होने का दावा किया था।

इस मामले ने बड़ा तूल तब पकड़ा जब यह दंपति नोएडा में एक टीवी स्टूडियो में दिखाई दिए गए, जहां उन्होंने जाति के कारण साक्षी के परिवार द्वारा शादी अस्वीकार करने का आरोप लगाया था। बाद में यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया, जिसने राज्य सरकार को दंपति को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया और उनकी शादी को वैध भी ठहराया।

इस जोड़े ने अपनी शादी के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जब वे अदालत में पेश हुए, तो सुरक्षाकर्मियों ने मीडिया को बाहर ही रोक दिया था। इस बीच साक्षी और उसके पति ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दावा किया था कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर लड़की के पिता और ससुराल वालों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

साक्षी के करीबी एक सूत्र ने बताया कि भले ही उनकी शादी को कोर्ट ने वैध ठहरा दिया हो, लेकिन वे ‘सभी संदेहों को दूर करने’ के लिए शादी का पंजीकरण कराना चाहते थे। पति-पत्नी दिल्ली लौट गए हैं।

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