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बिजनेस

बिना पैसे दिए घर ले आईए ये शानदार कार, आज ही पहुंचे एजेंसी पर

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नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं ठहर जाइए। मार्केट में एक ऐसी स्कीम आई है जिससे आप बिना पैसे दिए अपनी मनपसंद कार घर ला सकते हैं। चौंक गए न? बात हैरानी की जरूर है लेकिन सौ फीसदी सही है।

दरअसल, कार कंपनियों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए लीज प्रोग्राम लांच कर दिया है। इस प्रोग्राम के तहत ग्राहकों को न तो डाउनपेमेंट देने होता है और न ही मेटेनेंस की कोई चिंता करनी होती है।

ये प्रोग्राम लॉन्च करने वाली कंपनियों में ह्यूंदै, महिंद्रा, स्कोडा और फिएट शामिल हैं। लीज प्रोग्राम में आप कार कंपनियों से 2 से 5 साल के लिए कार ले सकते हैं।

फिलहाल ये स्कीम बेंगलुरु, दिल्ली, चैन्नई, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-NCR में उपलब्ध होगी। स्कीम के तहत सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी क्रेटा 17,642 रुपये के मासिक किराये पर मिलेगी, जिसमें जीएसटी भी शामिल हैं।

पांच साल तक यह कीमत चुकानी होगी। वहीं अगर नई क्रेटा शोरूम से खरीदते हैं, तो इसके लिए 2.73 लाख रुपये की डाउनपेमेंट देनी होगी और पांच सालों तक ईएमआई के तौर पर 18,901 रुपये चुकाने होते हैं।

लीज पर मिलने वाली कारों में रोड टैक्स, इंश्योरेंस, ब्रेकडाउन असिस्टेंस, एक्सिडेंटल रिपेयर, एंड-टू-एंड मेंटेनेंस, शेड्यूल टायर और बैटरी में बदलाव और एक रिप्लेसमेंट व्हीकल जैसी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

नेशनल

सुप्रीम कोर्ट ने होमबायर्स में फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने के दिए निर्देश

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आम्रपाली के घर खरीदने वालों को खुश करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे होमबायर्स में फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन शुरू करें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा सौंपने में उनके हिस्से में किसी तरह की देरी हुई तो दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। आम्रपाली ग्रुप की लंबित परियोजनाओं से संबंधित मामले में अपना फैसला सुनाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने बैंकों, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को अचल संपत्ति कंपनी में चल रही गड़बड़ी के लिए दोषपूर्ण ठहराया था।

आम्रपाली के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) रजिस्ट्रेशन को रद्द करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य द्वारा संचालित एनबीसीसी को आम्रपाली ग्रुप की लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कहा है। इस बीच एनबीसीसी ने लंबित मकानों के निर्माण को पूरा करने के लिए 7.5 करोड़ रुपये मांगे हैं। रॉयल गोल्फ को अदालत द्वारा 50 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया है जबकि बैंकों की याचिका पर कोई सुनवाई नहीं होगी।

होमबॉयरों ने पहले आम्रपाली ग्रुप की परियोजनाओं में बुक किए गए लगभग 42,000 फ्लैटों पर कब्जे की मांग करते हुए कई याचिकाएँ दायर की थीं। पिछले महीने, एससी ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली ग्रुप के निदेशकों और प्रमोटरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया था। आपको बता दें कि अदालत ने पहले सीएमडी और निदेशकों – शिव प्रिया और अजय कुमार की व्यक्तिगत संपत्तियों की कुर्की का आदेश दिया था।

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