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बर्थडे मना रहे शख्स ने शेर के चेहरे पर जबरदस्ती लगा दिया केक, फिर जो पार्टी में हुआ……

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नई दिल्ली। किसी के जन्मदिन पर आपने एक-दूसरे के चेहरे पर केक लगाते कई बार देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी किसी शेर के मुंह पर बर्थडे केक लगाते देखा है? रह गए न हैरान?

आज कल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोस्तों के साथ बैठा एक शख्स शेर के मुंह पर केक मारते देखा जा सकता है।

पार्टी में शेर के चेहरे पर केक मारते ही पार्टी में मौजूद सभी लोग हंसने लगे। केक चेहरे पर लगने के बाद शेर को कुछ समझ में नहीं आता और वो इधर-उधर भागने लगता है।

पार्टी में मौजूद एक शख्स ने इस घटना की कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिसके बाद यूजर्स ने मालिक को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

इस वीडियो को ट्विटर पर 5 जून को शेयर किया गया था। वीडियो पर कमेंट करते हुए एख शख्स ने लिखा कि वीडियो में मौजूद हर शख्स को अपने मुंह पर केक मारने की जरुरत है। इस वीडियो को अभी तक 50 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

 

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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