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शख्स ने चूहे के लिए बनवा दिया आलीशान बंगला, देखें शानदार तस्वीर

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लंदन। आज के समय में जहां लोग केवल अपने फायदे के बारे में सोचते हैं ऐसे माहौल में कुछ ऐसे भी दरियादिल लोग हैं जो दूसरों की मदद करने कभी पीछे नहीं हटते।

चाहे वो कोई चूहा ही क्यों न हो? जी हां हम बात कर रहे हैं एक शख्स की जिसने चूहों की जिंदगी बचाने के लिए उन्हें लिए आलीशान बंगला बनवा दिया।

शख्स का नाम साइमन डेल है। डेल एक प्रोफेशनल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हैं। डेल ने अपने बगीचे के एक हिस्से में चूहों के लिए ये शानदार घर बनवाया है। वे उन्हें फल तथा कई तरह की खाने की चीजें देते हैं।

डेल बताते हैं, “मैंने कुछ दिन पहले घर के पीछे स्थित बगीचे को संवारने का काम शुरू किया था। देखा कि एक जंगली चूहा लगातार मुझे देख रहा है।

उससे कुछ ही दूरी पर एक बिल्ली उस चूहे को ताक रही थी। मुझे लगा कि बिल्ली चूहे का शिकार कर लेगी। सुरक्षा देने के लिए मैं घर में गया और एक बॉक्स लाकर मिट्‌टी में फिट कर कंटीले तार लगा दिए।”

डेल ने चूहे का नाम रखा जॉर्ज। उन्होंने बताया कि चूहा उनके बनाए घर में रहने लगा। फिर मैंने देखा कि उसके साथ एक चूहिया भी थी और वह गर्भवती थी। कुछ वक्त बाद वहां और चूहे जमा हो गए।

डेल ने बताया कि जब उनका परिवार बढ़ने लगा तो मैंने कुछ कमरे और बना दिए। जो अंदर ही अंदर एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। कुछ ही दिनों में डेल ने चूहों के लिए मिनी गांव बना डाला।

अब यहां नौ चूहों का एक परिवार बस चुका था। चूहों के घर के पास मक्का, जामुन, सेब, मूंगफली जैसे कई तरह की चीजें जमा कीं। डेल कहते हैं कि जब चूहे इन चीजों को खाकर संतुष्टि महसूस करते हैं तो मैं अपने कैमरे से उनके चेहरे के भाव कैद करता हूं।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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