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नेशनल

इस जगह होगी देश की सबसे खूबसूरत मुस्लिम सांसद की शादी, हिंदू है दूल्हा

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद पश्चिम बंगाल के बशीरहाट लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां ने सबसे खूबसूरत सांसद होने का तमगा हासिल कर लिया है।

नुसरत जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नूसरत 19-21 जून के बीच शादी कर सकती हैं। खबर है कि वे कोलकाता के बिजनेसमैन निखिल जैन संग डेस्टिनेशन वेडिंग करेंगी।

29 साल की नुसरत और निखिल की ग्रैंड वेडिंग टर्की के बोडरम में होगी। 16 जून को नुसरत अपनी फैमिली और फ्रेंड्स संग टर्की के लिए रवाना होंगी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 17 जून को प्री-वेडिंग सेरेमनी का आयोजन होगा वहीं 18 जून को मेहंदी और संगीत का कार्यक्रम होगा।

नुसरत की बेस्ट फ्रेंड और टीएमसी की सांसद एक्ट्रेस मिमी चक्रवर्ती भी नुसरत की शादी का हिस्सा बनेंगी। आपको बता दें कि संसद सत्र के दौरान नुसरत शादी करने जा रही हैं इसके बावजूद उनकी दोस्त मिमी उनके लिए वक्त निकालकर तुर्की जाएंगी।

नुसरत की लव स्टोरी के बारे में कहा जाता है कि दोनों की मुलाकात पिछले साल दुर्गा पूजा के समय हुई थी। तब एक्ट्रेस साड़ी के विज्ञापन के लिए शूट कर रही थीं।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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