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सेना के जवानों ने किया 70 महिलाओं से रेप, मामला दर्ज

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नई दिल्ली। सूडान में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां राजधानी खार्तूम में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पहले अर्धसैनिकों ने हमला किया फिर उनसे साथ रेप जैसे घिनौने अपराध को अंजाम दिया।

डॉक्टरों का दावा है कि अर्धसैन्य बलों के जवानों द्वारा हमले के बाद कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ रेप किया गया। सोमवार को हुए अर्ध सैन्य बलों के हमले में 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जबकि 700 लोगों के घायल होने की खबरें हैं।

डॉक्टरों ने आरोप लगाए हैं कि कई प्रदर्शनकारियों की हत्या करके उनके शवों को नील नदी में फेंका जा रहा है। डॉक्टरों की केंद्रीय कमिटी से जुड़े एक डॉक्टर ने कहा कि खार्तूम के हॉस्पिटलों में हमले के बाद 70 से ज्यादा रेप के मामले दर्ज किए गए हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, सैनिक महिलाओं को अरेस्ट करके उन्हें छिपे हुए हिरासत कैंपों में ले जा रहे थे. उन महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी तस्वीरें खींची गईं और उनके साथ यौन हिंसा की गई।

आपको बता दें कि सूडान में इस समय सेना का शासन है। 6 अप्रैल से ही प्रदर्शकारी सेना के मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। सेना ने राष्ट्रपति उमर अल-बशीर का तख्तापलट कर दिया था जिसके बाद से ही प्रदर्शकारी सूडान की सत्ता को लेकर सेना के साथ समझौते की कोशिश कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि चुनाव के लिए लंबा वक्त मिलना चाहिए ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सकें और पिछली सरकार के प्रभाव को खत्म किया जा सके।

 

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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