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कहां खींची गई नोट पर दिखने वाली महात्मा गांधी की तस्वीर, दिलचस्प किस्सा जानें यहां

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नई दिल्ली। भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को ये बात मालूम है कि हर भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की फोटो होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नोट दिखने वाली ये फोटो कहा से क्रॉप की गई है। नहीं पता? हम बताते हैं….

दरअसल, साल 1949 तक किंग जॉर्ज की फोटो वाले नोट चलन में थे। इसके बाद किंग जॉर्ज की तस्वीर वाले नोटों को बंदकर अशोक स्तंभ वाले नोट जारी किए गए। यह सिलसिला कई सालों तक चला। साल 1996 में इन नोटों में अशोक स्तंभ को हटाकर महात्मा गांधी की तस्वीर को जगह दी गई।

यह तस्वीर उस समय खींची गई, जब गांधी जी ने तत्कालीन बर्मा (म्यांमार) और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात की थी।

इसी तस्वीर से गांधीजी का चेहरा पोट्रेट के रूप में भारतीय नोटों पर अंकित किया गया। मौजूदा समय में 5 रुपए से लेकर 2 हजार तक के नोट में गांधीजी की यही फोटो नजर आती है।

आपको बता दें कि गांधीजी की ये तस्वीर साल 1987 में भारतीय नोटों में वाटरमार्क के रूप में इस्तेमाल की गई थी। लेकिन 1996 के बाद हर एक नोट में गांधीजी का चित्र अंकित हो गया।

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा सके इस जलकुंड का रहस्य, ताली बजाते ही उबलने लगता है पानी

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पूरी दुनिया में कई ऐसे कुंड हैं जो वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं। ऐसा ही एक जलकुंड भारत में भी है जिसका रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं सका है। इस कुंड के रहस्य को जानकर आप दांतो तले उंगलिया दबा लेंगे। आईए जानते हैं इस कुंड के रहस्य के बारे में…

रहस्य से भरा ये कुंड झारखंड के बोकारो जिल में स्थित है। इसके बारे में कहा जाता है कि अगर आप कुंड के सामने ताली बजाएंगे तो पानी अपने आप ऊपर उठने लगता है।

देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों पानी उबल रहा हो। ऐसा क्योँ होता है इस बात का पता आज तक भू-वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए हैं।

इसे दलाही कुंड के नाम से जाना जाता है। यह कंक्रीट की दीवारों से घिरा हुआ है। कहते हैं कि इस कुंड में से गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म पानी निकलता है।

यह भी एक रहस्य ही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कुंड के नहाने वाले लोगों के चर्म रोग सही हो जाता है। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस कुंड के पानी से नहाने पर चर्म रोग दूर होते हैं तो इसका मतलब ये है कि इसमें गंधक और हीलियम गैस मिला हुआ है।

इस जगह पर हर साल मकर संक्रांति पर मेला लगता है। दूर-दूर से लोग यहां नहाने के लिए आते हैं। इस रहस्यमयी कुंड के पास ही दलाही गोसाईं नामक देवता का स्थान है, जहां हर रविवार को लोग पूजा करने के लिए आते हैं।

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