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अब नितिन गडकरी ने Exit Poll पर उठाए सवाल, कह दी ये बड़ी बात

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नई दिल्ली। 19 मई को मतदान के बाद आए सभी एग्जिट पोल में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को बहुमत मिलता दिख रहा है। एग्जिट पोल जारी होने के बाद अब इसके सटीक होने पर सवाल उठने लगे हैं।

विपक्षी पार्टियों ने इसे सिरे से नकारते हुए 23 मई तक इंतजार करने की बात कही है। वहीं अब इन एग्जिट पोल्स पर उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू के बाद मोदी सरकार के मंत्री और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सवाल खड़े किए हैं।

सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा कि एग्जिट पोल अंतिम निर्णय नहीं है। हालांकि कि उन्होंने केंद्र में दोबारा बीजेपी की सरकार बनने की बात कही।

प्रधानमंत्री की बायोपिक ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ के नए पोस्टर के लांच के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में गडकरी ने कहा, “एक्जिट पोल ‘अंतिम निर्णय’ नहीं हैं, बल्कि संकेत करते हैं। हालांकि एक्जिट पोल में जो भी होता है, कमोबेश रिजल्ट में आता है।” इससे पहले उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू भी एक्जिट पोल को लेकर अपने राय रख चुके हैं।

नायडू ने गुंटूर में अपने संबोधन में कहा था, “हमें यह समझने की जरूरत है कि वर्ष 1999 से अधिकतर एक्जिट पोल गलत साबित हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “मतगणना के दिन तक सभी अपना आत्मविश्वास जाहिर करते हैं। लेकिन इसका आधार नहीं है. हमें 23 तक इंतजार करना होगा.” उन्होंने कहा, “देश को एक योग्य नेता और स्थिर सरकार की जरूरत है, यह कोई भी हो सकता है.”

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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