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लव लेटर देने के लिए नवाजुद्दीन करते थे ऐसी टेक्निक का इस्तेमाल, जानकर आइंस्टीन भी शरमा जाए!

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मुंबई। बॉलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में दिए एक इंटरव्यू की वजह से सुर्खियों में हैं। गांव कनेक्शन को दिए इस इंटरव्यू में नवाज ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे राज खोले हैं जो शायद ही पहले किसी को पता होगी।

इंटरव्यू के दौरान अपने गांव की यादें ताजा करते हुए उन्होंने अपने बारे में बेबाकी से बताया। उन्होंने बताया कि बचपन में वो बेहद खुराफाती थे। वो गांव में उन्हीं लड़कों के साथ रहते थे जो खुराफात में मास्टरमाइंड थे।

इंटरव्यू में उन्होंने गांव में लड़कियां ताड़ने की खास टेक्निक भी बताई जिसका इस्तेमाल वो किया करते थे। उन्होंने बताया, ‘हमारे गांव में लाइट बिल्कुल नहीं थी। लालटेन हुआ करती थी। पर आदत पड़ गई थी। लालटेन में सारे काम करने की। पढ़ाई भी उसी में करते थे।’

पर्सनल लाइफ के बारे में बात करते हुए नवाज ने कहा, ‘गांव की एक लड़की थी जिसे मैं बहुत पसंद करता था। उस लड़की मेरी से बातचीत लेटर के जरिए हुआ करती थी। मैं पतंग में लेटर बांध कर उसे लड़की की छत पर गिरा देता था। लड़की इस लेटर को पढ़ने के बाद दोबारा लेटर के जरिए ही इसका जवाब दिया करती थी।’

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जानिए करण जौहर ने क्यों कहा, ‘मैं माफी नहीं मांगूंगा’

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मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों या अमीरों को प्राथमिकता देने के लिए फिल्मकार करण जौहर को अकसर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन करण का कहना है कि वह अपनी बनाई हुई फिल्मों के लिए माफी नहीं मांगेंगे, हालांकि बदलते वक्त के साथ वह सिनेमा बनाने की अपनी पद्धति को बदलने के लिए तैयार हैं।

मुंबई में लेखिका शुनाली खुल्लर श्रॉफ की किताब ‘लव इन द टाइम ऑफ एफफ्लूएन्जा’ की लॉन्चिंग पर मीडिया से बात करने के दौरान करण ने कहा, “मैंने उस किस्म की फिल्में इसलिए बनाई है क्योंकि मैं एक निश्चित माहौल में बड़ा हुआ हूं और वहां एक ऐसी तमन्ना भी थी जो मेरे सोचने के तरीके के साथ जुड़ी हुई थी। मैं हमेशा सोचता था कि सिनेमा असल जीवन से कहीं ज्यादा है और इसलिए मैंने ऐसे किरदार बनाए जिनकी लोग तमन्ना करते हैं।”

करण ने आगे कहा, “लेकिन कहीं न कहीं आगे चलकर सिनेमा का रचनाक्रम बदल गया और मुझे उसे स्वीकारना होगा और निश्चित करना होगा कि मेरे किरदार और भी ज्यादा जमीन से जुड़े हुए और वास्तविक हो ताकि वह अब और ज्यादा चमक-धमक वाले नहीं लगे।”

करण ने यह भी कहा, “मुझ पर एफफ्लूएंजा का आरोप है, लेकिन यह कहते हुए मैं उन फिल्मों के लिए माफी नहीं मांगूंगा जिन्हें मैंने बनाया है हालांकि मुझे लगता है कि भविष्य में मुझे इसमें बदलाव लाना होगा।”

एफफ्लूएंजा का तात्पर्य अमीरों की समस्या से है। अधिकतर ऐसा माना जाता है कि अमीरों के पास वास्तव में कोई परेशानियां नहीं होती है। जिंदगी को जीने में उन्हें अकेलापन, जीवन से उब जाना या असंतुष्ट हो जाने जैसी समस्याओं का ही सामना करना पड़ता है और इसमें खुद को खुश रखने के लिए वे पैसों के पीछे भागते हैं।

 

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