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बिजनेस

हीरो मोटोकॉर्प ने निकाली शानदार स्कीम, 555 रुपए में घर ले जाएं स्कूटी

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नई दिल्ली। हीरो मोटोकॉर्प की तरफ से कस्टमर्स के लिए शानदार ऑफर निकाला गया है। इस ऑफर के तहत आपको नई स्कूटी घर ले जाने के लिए आपको केवल 555 रुपए खर्च करने होंगे।

हालांकि 555 रुपए में स्कूटी घर ले जाने का गणित थोड़ा पेचीदा है। इस स्कीम के तहत अगर कोई हीरो का नया स्कूटर खरीदता है तो वह पांच साल के भीतर उसे कंपनी को ही बेच सकता है।

हीरो के प्रोडक्‍ट को बेचकर खरीदने के इस ”बायबैक” ऑफर की शुरुआत अभी दिल्ली और बेंगलुरु से हुई है। कंपनी ने इस स्कीम का नाम बायश्योरेंस रखा है। इस स्कीम के तहत पुरानी स्कूटी वापस करने पर ग्राहकों को 60-65 फीसदी रकम वापस कर दी जाएगी।

आईए समझते हैं स्कीम का पूरा गणित

अगर आपने 50 हजार रुपये एक्स शोरुम प्राइस पर एक नया स्कूटर खरीद लिया है और फिर 3 साल बाद उसे कंपनी को बेच देते हैं तो एक्स शोरुम प्राइस का 60 फीसदी के हिसाब से 30 हजार रुपये वापस कर दिया जाएगा।

ऐसे में ग्राहक को स्कूटर की कीमत 20 हजार रुपये देनी होगी। इस हिसाब से ग्राहक ने 6, 666 रुपये सालाना खर्च किए, जो कि 555 रुपये प्रतिमाह और 18.50 रुपये रोजाना आता है।

ऐसे में माना जाएगा कि ग्राहक रोजाना 18.50 रुपये खर्च करके तीन साल तक स्कूटर चलाता रहा। इस स्कीम के बारे में नजदीकी हीरो मोटोकॉर्प डीलरशिप स्टोर पर अधिक जानकारी मिल सकती है।

नेशनल

सुप्रीम कोर्ट ने होमबायर्स में फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने के दिए निर्देश

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आम्रपाली के घर खरीदने वालों को खुश करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे होमबायर्स में फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन शुरू करें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा सौंपने में उनके हिस्से में किसी तरह की देरी हुई तो दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। आम्रपाली ग्रुप की लंबित परियोजनाओं से संबंधित मामले में अपना फैसला सुनाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने बैंकों, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को अचल संपत्ति कंपनी में चल रही गड़बड़ी के लिए दोषपूर्ण ठहराया था।

आम्रपाली के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) रजिस्ट्रेशन को रद्द करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य द्वारा संचालित एनबीसीसी को आम्रपाली ग्रुप की लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कहा है। इस बीच एनबीसीसी ने लंबित मकानों के निर्माण को पूरा करने के लिए 7.5 करोड़ रुपये मांगे हैं। रॉयल गोल्फ को अदालत द्वारा 50 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया है जबकि बैंकों की याचिका पर कोई सुनवाई नहीं होगी।

होमबॉयरों ने पहले आम्रपाली ग्रुप की परियोजनाओं में बुक किए गए लगभग 42,000 फ्लैटों पर कब्जे की मांग करते हुए कई याचिकाएँ दायर की थीं। पिछले महीने, एससी ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली ग्रुप के निदेशकों और प्रमोटरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया था। आपको बता दें कि अदालत ने पहले सीएमडी और निदेशकों – शिव प्रिया और अजय कुमार की व्यक्तिगत संपत्तियों की कुर्की का आदेश दिया था।

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