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कैसरगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी धनंजय शर्मा ‘डब्बू’ के समर्थन में आए कई ब्राह्मण संगठन

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लखनऊ। कैसरगंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी धनंजय शर्मा के समर्थन में कई संगठन उतर आए हैं। वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक व विचारक पंडित राजनाथ शर्मा के पुत्र धनंजय शर्मा 57-  कैसरगंज, लोकसभा सीट, बहराइच से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं।

पिछले काफी समय से धनंजय के हर वर्ग, हर तबके व हर इलाके में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए कैसरगंज वासियों के प्रिय बन गए हैं। ब्राह्मणों के कई बड़े संगठन ने उनको अपना आशीर्वाद दिया है।

धनंजय शर्मा को ‘अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ’ ने अपना समर्थन पत्र जारी कर पूर्ण समर्थन दिया है। इससे पूर्व 30 अप्रैल को जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा स्थापित ‘ब्राह्मण संसद’ ने धनंजय शर्मा को अपना पूर्ण समर्थन का खुला पत्र जारी किया था।

धनंजय शर्मा ‘डब्बू’ को ब्राह्मण संसद सहित अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने अपना पूर्ण समर्थन, प्रेम व आशीर्वाद प्रदान करते हुए, समाज के सभी वर्गों से धनंजय शर्मा का समर्थन व सहयोग करके भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की है। जिससे समाज के सभी वर्गों के साथ- साथ इस  लोकसभा क्षेत्र का उज्जवल भविष्य व बेहतर विकास संभव हो सके।

 

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साक्षी मिश्रा ने बरेली में कराया शादी का रजिस्ट्रेशन, बन गई साक्षी नायक

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लखनऊ। पिछले महीने भागकर शादी करने और उसके बाद की घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहे साक्षी मिश्रा और अजितेश चुपचाप बरेली लौट आए और यहां अपने विवाह का पंजीकरण कराया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच बरेली लौटे दंपति रजिस्ट्रार कार्यालय गए और वहां उन्होंने अपनी शादी का पंजीकरण कराया। इस जोड़े ने पहले ही प्रयागराज के एक मंदिर में शादी कर ली थी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विवाह को वैध ठहराया गया था।

भाजपा विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा ने एक दलित लड़के अजितेश से तीन जुलाई को भागकर शादी कर ली थी। इस जोड़े ने बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने साक्षी के पिता और भाई से अपनी जान को खतरा होने का दावा किया था।

इस मामले ने बड़ा तूल तब पकड़ा जब यह दंपति नोएडा में एक टीवी स्टूडियो में दिखाई दिए गए, जहां उन्होंने जाति के कारण साक्षी के परिवार द्वारा शादी अस्वीकार करने का आरोप लगाया था। बाद में यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया, जिसने राज्य सरकार को दंपति को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया और उनकी शादी को वैध भी ठहराया।

इस जोड़े ने अपनी शादी के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जब वे अदालत में पेश हुए, तो सुरक्षाकर्मियों ने मीडिया को बाहर ही रोक दिया था। इस बीच साक्षी और उसके पति ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दावा किया था कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर लड़की के पिता और ससुराल वालों की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

साक्षी के करीबी एक सूत्र ने बताया कि भले ही उनकी शादी को कोर्ट ने वैध ठहरा दिया हो, लेकिन वे ‘सभी संदेहों को दूर करने’ के लिए शादी का पंजीकरण कराना चाहते थे। पति-पत्नी दिल्ली लौट गए हैं।

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