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नेशनल

सावधानः फानी तूफान और ज्यादा हुआ शक्तिशाली, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

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नई दिल्ली। मौसाम विभाग ने चक्रवाती तूफान फानी को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। विभाग के मुताबिक यह तूफान अगले 12 घंटे में और भीषण चक्रवाती तू्फान में तब्दील हो सकता है।

साभार गूगल

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि पुडुचेरी के साथ-साथ तमिलनाडु और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की स्थिति 3 मई तक ठीक नहीं होगी। केरल के सुदूर इलाकों में 29 और 30 अप्रैल को तेज बारिश हो सकती है।

ओडिशा राज्य आपदा प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक, दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में 115 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।

इसका असर दूसरे नजदीक के राज्यों पर भी पड़ सकता है। सभी बड़े बंदरगाहों मछलीपट्टनम, कृष्णट्टनम, निजमापट्नम, विशाकापट्टनम, गंगावरम और काकीनंदा पर वॉर्निंग सिग्नल नंबर दो जारी किया गया है।

इससे पहले मौसम विभाग ने कहा कि अगले 12 घंटे में इसके भीषण चक्रवाती तूफान और अगले 24 घंटे में बेहद भीषण चक्रवाती तू्फान में तब्दील होने के आसार हैं।

केरल के सुदूर इलाकों में 29 और 30 अप्रैल को तेज बारिश हो सकती है. इसने कहा कि चक्रवात तमिलनाडु नहीं पहुंचेगा, लेकिन इसके असर से उत्तरी भागों में हल्की बारिश हो सकती है. इससे पहले चेन्नई सहित उत्तरी तमिलनाडु में भारी बारिश की उम्मीद की जा रही थी।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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