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बड़ी खबरः नामांकन दाखिल करने से पहले पीएम मोदी को लेनी होगी ‘कोतवाल’ से अनुमति!

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना नामांकन दाखिल करने वाराणसी पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को पीएम मोदी इस लोकसभा सीट से अपना नामांकन करेंगे लेकिन इस सीट से पर्चा भरने से पहले पीएम मोदी को ‘कोतवाल’ से अनुमति लेनी होगी।

अगर आप कोतवाल का मतलब पुलिस समझ रहे हैं तो बता दें कि हम किसी पुलिस अधिकारी की नहीं बल्कि ‘काशी के कोतवाल’ काल भैरव की बात कर रहे हैं।

काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। हिंदू मान्यता के मुताबिक उन्हें स्वंय भोलेनाथ ने काशी में नियुक्त किया था। कहा जाता है कि काशी में रहने के लिए काल भैरव की अनुमति लेना जरूरी होता है।

पीएम मोदी जब भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाते हैं तो वह काल भैरव की पूजा जरूर करते हैं। ऐसा माना गया है कि वाराणसी में रहना है तो काशी के कोतवाल का दर्शन करना जरूरी है।

ये ऐसे देवता हैं जिन्हें सब पसंद है। चाहे वह टॉफी, बिस्किट, मिठाई या दारू से लेकर गांजा भांग। आज भी ये काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। इनका दर्शन किए बगैर विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है।

वाराणसी के कोतावली पुलिस थाने में एसएचओ की कुर्सी पर बाबा काल भैरव विराजते हैं। अफसर बगल में कुर्सी लगाकर बैठते हैं। कहा जाता है कि ये परंपरा सालों से चली आ रही है।

यहां कोई भी थानेदार जब पोस्टिंग होकर आया, तो वो अपनी कुर्सी पर नहीं बैठा। कोतवाल की कुर्सी पर हमेशा काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव विराजते हैं। वो शहर के रक्षक हैं। शहर में बिना काल भैरव की इजाजत के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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