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24 साल बाद मुलायम ने कही ऐसी बात, सुनकर मुस्कुराने लगी मायावती

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नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश का मैनपुरी में 24 साल बाद एक दूसरे के धुर विरोधी रहे मायावती और मुलायम सिंह यादव एक मंच पर दिखे।

लगभग ढाई दशक बाद मुलाकात होने पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव खुश नजर आए और मैनपुर आने पर धन्यवाद भी दिया। मुलायम ने कहा कि हम और मायावती लंबे समय के साथ एक मंच पर आए हैं।

मैं सभी से कहना चाहूंगा कि मायावती जी का सम्मान करना, रैली के दौरान उन्होंने कहा कि जब भी जरूरत पड़ी है, तब-तब मायावती ने हमारा साथ दिया है और हमने भी उनका साथ दिया है। इसलिए मायावती का सम्मान जरूर करना। मुलायम की ये बातें सुनकर मायावती मुस्कुराती रहीं।

आपको बता दें कि 2 जून 1995 को हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद दोनों पार्टियों के बीच तलवारें खिंच गई थी। इस घटना के बाद माय़ावती कई बार सार्वजनिक मंच से मुलायम पर निशाना साध चुकी हैं।

24 साल बाद ये पहला मौका है जब मायावती और मुलायम सिंह यादव एक साथ एक मंच पर आए हैं। रैली में बसपा प्रमुख मायावती मुलायम की तारीफ करने में पीछे नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि मुलायम ही पिछड़े वर्ग का असली नेता कहते हुए नरेद्र मोदी को फर्जी ओबीसी बता दिया।

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मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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