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नेशनल

52 बम धमाके करने वाले आतंकी को पकड़ने निकला शख्स, 24 मई तक ढूंढ निकालने का किया दावा!

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नई दिल्ली। साल 2007 से 2013 के बीच 7 शहरों में 52 ब्लास्ट के अंजाम देने वाला खूंखार आतंकी को भारत का एक जांबाज शख्स बिना किसी हथियार के पकड़ने निकल पड़ा है।

खुद को यह आतंकी भारत का ओसामा बताता है। ऊपर लिखी लाइन को पढ़कर अगर आपका दिमाग और ज्यादा इस आतंकी के बारे में जानने की कोशिश कर रहा है तो बता दें कि हम रियल नहीं रील लाइफ की बात कर रहे हैं।

दरअसल, हम बात कर रहे हैं अर्जुन कपूर स्टारर फिल्म इंडियाज मोस्ट वांटेड की। मंगलवार को इस फिल्म का टीजर रिलीज कर दिया गया।

फिल्म में अर्जुन खूंखार आतंकी की तलाश करते नजर आएंगे। फिल्म का टीजर काफी प्रॉमिसिंग लग रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार गुप्ता ने किया है।

फिल्म में अर्जुन के अलावा अमृता पुरी और राजेश शर्मा मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के बारे में निर्देशक ने एक इंटरव्यू में कहा था, ऐसे समय पर जब दर्शकों को सुपरहीरो फिल्में पसंद आ रही हैं, मेरी फिल्म ऐसे वास्तविक हीरो के बारे में है जो जिंदगी को बचाता है।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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