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मंदिर में पूजा के दौरान शशि थरूर हुए बड़े हादसे का शिकार, खून से लथपथ हुआ कुर्ता

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नई दिल्ली। केरल के तिरुवनंतपुरम में पूजा करते समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर बड़े हादसे का शिकार हो गए। पूजा के दौरान थरुर अचानक गिर पड़े।

इसमें उन्हें गंभीर चोट आई है। घटना के तुरंत बाद उन्हें तिरुवनंतपुरम के जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें माथे में गहरी चोट आई है।

इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि थरूर के माथे पर गहरी चोट लगी थी जिसके बाद उनके सिर पर छः टांके लगाने पड़े। आपको बता दें कि मंदिर में तुलाभ्रम पूजा के दौरान यह हादसा हो गया।

तुलाभरम ऐसी पूजा है जो केरल के कुछ गिने चुने मंदिरों में ही होती है। इस पूजा में अपने वजन के बराबर चढ़ावा चढ़ाया जाता है। देवी-देवता को जो कुछ अर्पित करना है, उसे पहले अपने वजन के बराबर तोला जाता है। मंदिरों में वजन के लिए बड़ी बड़ी मशीनें लगी होती हैं।

थरूर फिर इस बार तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार हैं। इस सीट से दो बार कांग्रेस के सांसद चुने गए थरूर का मुकाबला बीजेपी नेता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल कुम्मानेम राजशेखरन और सीपीआई विधायक और राज्य के पूर्व मंत्री सी. दिवाकरन से है।

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मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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