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नशे में धुत तीन महिलाएं बीच सड़क पर बना रही थीं संबंध, बच्चों ने देखा और फिर…..

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नई दिल्ली। नशे में धुत तीन महिलाएं बीच सड़क पर संबंध बनाने की घटना सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि इस सड़क पर बच्चों और बूढ़ों बड़ी संख्या में गुजर रहे थे।

 

इन सबसे बेपरवाह होकर महिलाओं ने सबके सामने यह अश्लील हरकत की। करीब 10 मिनट तक की गई ये गंदी हरकत पास के सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई।

घटना ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन शहर के फोर्टीट्यूड की है। इस मामले में पुलिस ने कहना है कि इस घटना पर आरोपी महिलाओं पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। पुलिस ने कहा कि मुकदमा चलाने के लिए उनके पास कोई ठोस वजह नहीं है।

आपको बता दें कि यह अश्लील हरकत दिन के उजाले में चल रही थी। जिसके बाद स्थानीय लोगों को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस के आने के  बाद ही इन महिलाओं ने अश्लील हरकत बंद की। बाद में पुलिस ने महिलाओं को कपड़े पहनने में मदद की। इसके बाद उन्हें ऊबर कैब से भेज दिया गया।

क्वीन्सलैंड लॉ सोसायटी के प्रेसिडेंट बिल पॉट्स ने कहा है कि मुकदमा करना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वीडियो सबूत से ये बात समझ आती है कि जनता को परेशान करने का मामला बनता है।

बिल पॉट्स ने कहा कि ऐसी हरकतों को बिना देखे लोगों को सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल का हक है। क्वीन्सलैंड पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारियों के पास कोई आरोप नहीं है जो वे महिलाओं पर लगा सके।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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