Connect with us

अन्तर्राष्ट्रीय

करोड़पति भिखारी हर महीने कमाता है इतने रुपए, नोट गिनने के लिए लोगों को रखा है नौकरी पर

Published

on

नई दिल्ली। भारत में आपको भिखारी हर ट्रैफिक सिग्नल में पर मिल जाएगें। इन भिखारी को देखकर आपने कभी न कभी 2-4 रुपए दिए होंगे।

लेकिन आज हम आपको एक ऐसे भिखारी के बारे में बताने जा रहे जिसकी कमाई जानकर आप सोच में पड़ जाएंगे। हम बात कर रहे हैं चीन के एक भिखारी की जो हर महीने भीख मांग कर लाखों रुपए कमाता है। हर महीने उसके पास इतने नोट इकठ्ठा हो जाते हैं कि उन्हें गिनने के लिए इस शख्स को बाहर से लोगों को बुलाना पड़ता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भिखारी हर महीने केवल भीख मांगकर लगभग 1700 डॉलर की कमाई कर लेता है। भारत की मुद्रा के हिसाब से यह करीब एक लाख रूपए है।

इस भिखारी के 3 बच्चे हैं, जो बीजिंग के सबसे बड़े स्कूल में पढ़ाई करते हैं। यही नहीं पूरे परिवार का खर्चा भी यही उठाता है। भीख मांग-मांगकर उसने दो मंजिला घर भी बना लिया है।

ये भिखारी हर महीने पैसा जमाकर के डाक खाने पहुंचता है और वहां नोटों का ढेर लगाकर पैसे गिनता है। पैसों को गिनने के लिए वो डाकघर के स्थानीय कर्मचारियों की मदद भी लेता है इसके लिए वो कर्मचारियों को टिप के रूप में 900 रुपए भी देता है।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

Published

on

नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending