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भिखारी बनने की कगार पर पाकिस्तान, आसमान पर पहुंचे दूध के दाम!

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नई दिल्ली। भारत द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगाने के बाद पाकिस्तान की जनता की दाने-दाने तक को मोहताज हो गई है। पाकिस्तान में इस समय महंगाई का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तो छोड़िए दूध के दाम लगभग 200 रुपए पहुंच गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कराची डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने अचानक दूध के दाम में 23 रुपए लीटर तक दाम बढ़ा दिए हैं। इस भयंकर बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में दूध के दाम 180 रुपए तक पहुंच गए हैं।

बता दें कि पाकिस्तानी रुपये का वैल्यू भारतीय रुपये के मुकाबले करीब आधा ही है। महंगाई की मार झेल रही पाकिस्तान की जनता बढ़ती महंगाई की वजह से गुस्से में है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, एसोसिएशन ने कहा कि सरकार से उसने पहले कई बार अनुरोध किया था कि दाम बढ़ाया जाए, लेकिन सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उसे खुद यह निर्णय लेना पड़ा।

एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा कि वे इस मामले में किसी दखल के लिए अधिकारियों से मिले थे, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। चारे का दाम कई गुना बढ़ चुका है और ईंधन की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं।

दूसरी तरफ, प्रशासन ने एसोसिएशन के इस कदम को गलत बताया है और महंगा दूध बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने दूध के दाम 94 रुपये प्रति लीटर तय किया है।

इसके बावजूद खुदरा विक्रेता 100 से 180 रुपये लीटर तक के रेट में दूध बेच रहे हैं। प्रशासन ने कहा कि सभी डिप्टी कमिश्नर्स से कहा गया है कि वे महंगे दामों पर दूध बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त एक्शन लें। एक दुकानदार को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया है।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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