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ट्विटर के CEO लेते हैं इतनी कम सैलरी, जानकर खुद को अंबानी समझने लगेंगे आप!

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नई दिल्ली। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर अब शहरों के अलावा गांवों में भी पॉपुलर हो चला है। भारत में ट्विटर के यूजर्स में काफी इजाफा देखने को मिला है। इन सबके बीच आज हम आपको ट्विटर के सीईओ से जुड़ी एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप खुद को अंबानी समझने लगेंगे।

दरअसल ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने साल 2018 में इतनी कम सैलरी ली है जिसकी वजह से वो चर्चा में आ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने साल 2018 में 1.40 डॉलर (करीब 97 रुपये) की सैलरी ली है।

इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 में सीईओ बनने के  बाद पहली बार उन्होंने सैलरी ली है। कंपनी ने यूएस सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) को बताया है कि ट्विटर इंक के सीईओ जैक डोर्सी को साल 2018 में 1.40 डॉलर (करीब 97 रुपये) सैलरी मिली है। डोर्सी ट्विटर के को-फाउंडर भी हैं।

वे कंपनी की शुरुआत के दौर में भी दो साल तक सीईओ थे, लेकिन 2008 में उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था। साल 2015 में वह फिर से ट्विटर के प्रमुख बने। इसके बाद 2015, 2016 और 2017 में कंपनी की तरफ कोई भी सैलरी या बेनिफिट नहीं लिया। इसके अलावा उन्हें मोबाइन पेमेंट कंपनी ‘स्क्वायर’ से भी 2.75 डॉलर सालाना की सैलरी मिलती है।

दिसंबर 2018 में डोर्सी ने स्क्वायर के अपने 17 लाख शेयर बेचे थे। फोर्ब्स के मुताबिक उन्हें इससे करीब 8 करोड़ डॉलर की कमाई हुई थी। फिलहाल उनका कुल नेटवर्थ करीब 4.7 अरब डॉलर का है, जिसमें करीब 3.9 अरब डॉलर मूल्य के स्क्वायर के 6.1 करोड़ शेयर भी शामिल हैं।

ट्विटर के भी डोर्सी के पास करीब 60 करोड़ डॉलर मूल्य के शेयर हैं। उन्होंने इसके कोई शेयर नहीं बेचे हैं, जबकि ट्विटर के दूसरे को-फाउंडर इवान विलियम्स ने अप्रैल 2018 से अब तक अपने पास मौजूद ट्विटर के करीब 50 फीसदी शेयर बेच दिए या दान कर दिए हैं।

हालांकि डोर्सी अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो 1 डॉलर के आसपास की सैलरी लेते हों। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, ओरेकल के लैरी एलिसन और गूगल के लैरी पेज एवं सर्जे ब्रिन भी साल में एक डॉलर की सैलरी लेते हैं। साल 2012 में मार्क जुकरबर्ग ने सालाना सैलरी और बोनस के रूप में 7.70 लाख डॉलर लिए थे, अब वह सबसे कम वेतन हासिल करने वाले फेसबुक कर्मचारी हैं।

 

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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