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ट्रेन में मास्टरबेशन कर रही थी महिला, पुलिस ने पूछा तो बनाया ऐसा बहाना, हैरान रह गए यात्री!

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लंदन। लंदन से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यहां एक ट्यूब ट्रेन में लोगों ने एक महिला को मास्टरबेशन करते रंगे हाथों पकड़ लिया।

महिला की इस गंदी हरकत की लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब महिला से पूछताछ की तो उसने जो कहा वो हैरान कर देने वाला था। उसने कहा की उसे रैशेज की वजह से खुजली हो रही थी वो कोई सेक्सुअल एक्टिविटी नहीं कर रही थी।

महिला ने कहा कि वो हैमरस्मिथ और सिटी लाइन के बीच चार सीटों पर लेटी थी और खुजली कर रही थी। महिला का नाम सारा हिंक्सन है। हालांकि गवाह ने दावा किया है कि महिला का हाथ उसकी पैंट में था और वो मास्टरबेशन कर रही थी।

हालांकि, उसने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें पेल्विक एरिया में रैशेज हो गए हैं जिसकी वजह से उन्हें खुजली हो रही थी। गवाह ने कोर्ट को बताया कि महिला का एक हाथ बाहर था और दूसरा हाथ उसके ट्राउजर में था।

गवाह ने बताया कि वो महिला के सीट के पास ही बैठा था। इसलिए उसे समझ में आ गया कि वो ‘मास्टरबेशन कर रही थी। ये देखने के बाद मैं हैरान रह गया। गवाह मिस्टर ने ये सब देखने के बाद तुरंत पुलिस को कॉल किया क्योंकि वहां बच्चे भी मौजूद थे। बच्चे सारा हिंक्सन के ‘सेक्शुअल एक्ट’ को देख सकते थे।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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