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राजनीतिक दलों को RTI के दायरे में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

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नई दिल्ली। राजनीतिक दलों को भी आरटीआई के दायरे में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता अश्वनी उपाध्याय द्वारा यह याचिका दाखिल की गई है।

याचिका में भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता की बुराई से निपटने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाने को निर्देश देने को कहा गया है। इसमें कहा गया, ‘जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को आरटीआई की धारा 2(एच) के तहत ‘जन प्राधिकरण’ घोषित किया जाए।

चुनावों में काले धन के प्रयोग पर अंकुश और राजनीतिक दलों को जनता के प्रति जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाए।’ याचिका में निर्वाचन आयोग को आरटीआई एक्ट और राजनीतिक दलों से संबंधित अन्य कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। राजनीतिक दलों द्वारा नियमों का अनुपालन नहीं करने पर उन्हें पंजीकरण खत्म करने की बात कही गई है।

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रेलवे में ख़त्म होगा खलासी सिस्टम, नहीं होंगी नई भर्तियां

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना संजोए हुए हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। दरअसल रेलवे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करने वाले ‘बंगला पियुन’ या खलासियों की नियुक्ति की औपनिवेशिक काल की प्रणाली को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है और इस पद पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी किया।

रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी (TADK) संबंधी मामले की समीक्षा की जा रही है. आदेश में कहा गया है, ‘टीएडीके की नियुक्ति संबंधी मामला रेलवे बोर्ड में समीक्षाधीन है इसलिए यह फैसला किया गया है कि टीएडीके के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और न ही तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, एक जुलाई 2020 से इस प्रकार की नियुक्तियों को दी गई मंजूरी के मामलों की समीक्षा की जा सकती है और इसकी स्थिति बोर्ड को बताई जाएगी। इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए।

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