Connect with us

अन्तर्राष्ट्रीय

‘मेरे पास पैंटी पहनने का भी वक्त नहीं होता था, लोग संबंध बनाने के लाइन में खड़े रहते थे’

Published

on

नई दिल्ली। ISIS की आतंकी किस हद तक हैवानियत की हद पार कर देते हैं इस बात का सबूत एक महिला ने दिया है। महिला पहले आइएस की गिरफ्त थी जो कुछ ही समय पहले वहां से भागने में कामयाब रही।

आइएस के आतंकियों ने महिला के साथ उन 4 महीनों में जो किया वो सुनकर आप कांप जाएंगे। आतंकवादियों के चंगुल से छूटने वाली महिला का नाम फरीद खलफ है। फरीद अब अपनी नई जिंदगी शुरू करने जा रही है।

उन्हें अब जीवनसाथी मिल गया है और बहुत जल्द शादी करने वाली हैं। ISIS की गिरफ्त से आने के बाद फरीदा ने जो बताया उसको सुन कर दांत खट्टे हो जाते हैं।

उसने बताया की 4 महीने तक उसने अंडरवियर नहीं पहनी क्योंकि उसे तुरंत उतरवाया जाता था। फरीदा ने बताया कि वो 4 महीने आतंकियों की कैद से छूटकर आई है।

इन चार महीनों में उसके साथ रोज रेप होता था। इतना ही नहीं चार महीने उसे बिना अंडवियर के रखा गया था क्योंकि हर रोज करीब 40-50 बार उसके साथ रेप किया जाता था। उसके साथ वहां और भी लड़कियां थी।

फरीदा ने बताया कि उसने कई बार खुदखुशी करने की भी कोशिश की लेकिन आतंकियों ने उसे बचा लिया। फिर एक दिन वो 8 लड़कियों के साथ भागने में कामयाब हो गई। उसने बताया कि वहां उसके साथ वो सब हुआ जो शायद ही किसी के साथ होता।

आतंकियों ने उसके साथ जानवरों जैसे सुलूक किया। बता दें कि 2014 में ISIS के आतंकियों ने उसे किडनैप कर लिया था। उसके बाद वो उसे मोसूल ले गए। फिलहाल फरीदा अभी ठीक हैं और वो 21 साल की हो गई हैं। साथ ही अपना नया जीवन शुरू करने को तैयरा हैं। इस वक्त वो जर्मनी के रेफ्यूजी कैंप में हैं।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

Published

on

नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending