Connect with us

नेशनल

अखिलेश का मोदी को जवाब, कहा- जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं वो नहीं जानते ‘सराब’ और ‘शराब’ का अंतर

Published

on

लखनऊ। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक्शन मोड में आ गए हैं। अखिलेश यादव ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में बनारस व सुल्तानपुर के कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान अखिलेश ने कार्यकर्ताओं को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए जी जान से जुट जाने को कहा। पार्टी कार्यालय में सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, राजेंद्र चौधरी, पारसनाथ यादव और अबू आज़मी भी मौजूद थे।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेरठ की रैली में सपा-बसपा और रालोद गठबंधन की तुलना शराब से करने पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”आज टेली-प्रॉम्प्टर ने पोल खोल दी। ‘सराब’ और ‘शराब’ का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं। ‘सराब’ को मृगतृष्णा भी कहते हैं और यह वह धुंधला सा सपना है जो भाजपा 5 साल से दिखा रही है, लेकिन जो कभी हासिल नहीं होता। अब जब नया चुनाव आ गया तो वह नया ‘सराब’ दिखा रहे हैं।

आपको बता दें कि आज मेरठ में रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, ‘सपा का स, रालोद का रा और बसपा का ब मतलब सराब, ये शराब आपको बर्बाद कर देगी’। पीएम ने कहा कि यूपी में तो सब कुछ इतनी जल्दी-जल्दी हो रहा है कि पूछिए मत। दो लड़कों से बुआ-बबुआ तक पहुंचने में जो तेजी दिखाई गई है, वो गजब है।

नेशनल

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Published

on

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के पास रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए और केंद्र को ज्ञापन दिया जा सकता है। मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम ये नहीं कर सकते क्योंकि पहले ही संविधान में भारत नाम ही कहा गया है।

यह याचिका नमह (Namah) नामक दिल्ली के किसान की ओर से कोर्ट में डाली गई थी और संविधान के आर्टिकल-1 में बदलाव की मांग की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से ‘इंडिया’ को हटाकर ‘भारत’ नाम की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया नाम अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम अंग्रेजी में भी भारत करने से लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ेगी और देश को अलग पहचान मिलेगी। याचिका दायर करने वाले नमह ने कहा कि प्राचीन काल में देश को भारत के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद अंग्रेजी में देश का नाम ‘इंडिया’ कर दिया गया इसलिए देश के असली नाम ‘भारत’ को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending