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नेशनल

पीएम मोदी पर ओवैसी ने दिया विवादित बयान, कहा-अगर वो मेरे पास आए तो मैं…..

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नई दिल्ली। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपने ने खूब सुर्खियां बटोरीं। पीएम मोदी ने इस कैंपेन के तहत ट्विटर पर अपने नाम के आगे चौकदार जोड़ लिया।

जिसके बाद कई मंत्रियों ने भी अपने नाम के आगे यह शब्द लगा लिया। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)  इस कैंपने को बड़े ही आक्रमक तरीके से आगे बढ़ा रही है वहीं विपक्षी दल भी इस पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे हैं।

इस कैंपेन पर ताजा हमला AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने किया है। अपने बयानों ने विवादों में घिरे रहने वाले ओवैसी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री की चौकीदार शब्द में इतनी ही रुचि है तो वह मेरे पास आएं, मैं उन्हें चौकीदार की टोपी और सीटी दूंगा।

रविवार को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा, “ मैंने ट्विटर पर देखा ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी’, उन्हें अपने आधार और पासपोर्ट में भी चौकीदार जोड़ देना चाहिए। देश को एक प्रधानमंत्री की जरूरत है, किसी चायवाले या फिर पकौड़ेवाले की नहीं। अगर मोदी की रुचि है, तो उन्हें मेरे पास आना चाहिए मैं उन्हें चौकीदार की टोपी और सीटी दूंगा।

गौरतलब है कि तेलंगाना की सभी 17 लोकसभा सीटों पर पहले चरण में यानी 11 अप्रैल को मतदान होना है। हैदराबाद लोकसभा सीट से AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी चुनाव लड़ रहे हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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