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जब कपड़ो के लिए मनोहर पर्रिकर को गडकरी ने टोका, इस तरह कर दी थी बोलती बंद

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नई दिल्ली। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार शाम निधन हो गया। वह 63 साल के थे। पर्रिकर लंबे समय से पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थे।

उनके निधन की खबर आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। पर्रिकर को उनकी सादगी और आखिरी वक्त जनता की सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

उनके निधन पर तमाम बीजेपी नेताओं सहित केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पर्रिकर जी के जाने से पूरे देश और पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा है।

पर्रिकर को याद करते हुए नितिन गडकरी भावुक हो गए और कहा कि वह केवल राजनीतिक नेता के रूप में नहीं थे। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब मुझे बीजेपी ने गोवा की जिम्मेदारी सौंपी तब मैंने मनोहर पर्रिकर, श्रीपद नाइक, संजीव देसाई और दिगम्बर कामत इन चारों लोगों की टीम में उनके साथ काम किया। मैंने उनकी जीवन की राजनीति की शुरुआत देखी है।

आईआईटी इंजीनियर होने बाद भी उनका व्यवहार बहुत ही साधारण था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने कपड़े पहनने का ढंग नहीं बदला। अपना स्वभाव नहीं बदला।

और रक्षा मंत्री बनने के बाद भी वो वैसे ही रहे। जब मनोहर दिल्ली में आए तो मैंने उनसे कहा कि अपने कपड़े बदलो… यहां बहुत ठंड होती है, हाफ शर्ट में दिल्ली नहीं चलती। तो उन्होंने कहा मैं ऐसे ही रहूंगा।

 

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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