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चप्पल और हाफ शर्ट में बाइक से चलने वाले मनोहर पर्रिकर, देखें उनकी कुछ अनदेखी तस्वीरें

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नई दिल्ली। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार शाम निधन हो गया। वह 63 साल के थे। पर्रिकर लंबे समय से पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित थे। उनकी सादगी और आखिरी वक्त देश सेवा के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद देश सेवा का जज्बा

पर्रिकर चार बार गोवा के सीएम रहे। 14 मार्च 2017 को पर्रिकर चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने थे। आखिरी वक्त तक वो बीमारी से लड़ते हुए भी मुख्यमंत्री बने रहे।

सेना का उत्साह बढ़ाते मनोहर पर्रिकर

हैरानी वाली बात यह है कि चार बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद वह कभी भी अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। गोवा की राजनीति में मनोहर पर्रिकर की मजबूत पकड़ थी।

आम जनता के साथ लाइन में खड़े मनोहर पर्रिकर

अपनी सादगी की वजह से वो जनता में बेहद लोकप्रिय थे। कई बार कार्यकर्ताओं की बाइक पर ही बैठकर क्षेत्र में लोगों से मिलने निकल पड़ते थे। आईए देखते हैं सादगी पसंद पर्रिकर की कुछ अनदेखी तस्वीरें….

साइकिल का लुत्फ उठाते पर्रिकर

आम लोगों की तरह ढाबे पर खाना खाते हुए

 

ट्रेन में सेल्फी लेते हुए

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सावरकर पर दिग्विजय सिंह ने दिया बड़ा बयान, कहा-हम उनका सम्मान करते हैं लेकिन….

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नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में वीर सावरकर एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘भारत बचाओ’ रैली में राहुल गांधी के सावरकर पर की गई टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक उथल पुथल देखने को मिल रही है।

जहां एक ओर शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राहुल गांधी के इस बयान के बाद उन पर लगातार निशाना साध रहे हैं वहीं कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के बचाव में उतर आई है। इस बीच दिग्विजय सिंह ने भी सावरकर को लेकर बड़ा बयान दिया है।

एक टीवी चैनल से की गई खास बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम सावरकर का सम्मान करते हैं। बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा, मैं इतना ही कह सकता हूं कि दामोदर राव सावरकर के जीवन के दो पहलू हैं। एक वो है जब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए उन्हें सज़ा हुई और कालापानी भेजा गया।

दिग्विजय सिंह ने कहा, सावरकर के जीवन का दूसरा पहलू माफी लिखकर जेल से निकलने का है। माफी मांग कर जेल से निकलने के बाद उन्होंने अपने पूरे समय पूरे देश में ब्रिटिश हुकूमत की बांटो और राज करो की नीति को ही आगे बढ़ाया। इसलिए दोनों ही पहलू उनके जीवन में रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘मैं कहता हूं, जो भी व्यक्ति देश के लिए लड़ा है, हम उसका सम्मान तो करते हैं, लेकिन माफी मांगना एक अलग इतिहास है।’

 

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