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न्यूजीलैंड मस्जिद हमलाः प्रधानमंत्री ने किया बड़ा खुलासा, बताया हमले से 9 मिनट पहले उन्हें मिला था हमलावर का…….

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नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के दो मस्जिदों में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर 50 लोगों की हत्या करने वाले शख्स ब्रेंटन टैरेंट (28) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

रविवार को न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एर्डर्न ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि कि उन्हें क्राइस्टचर्च में हुए हमलों से महज नौ मिनट पहले हमलावर का घोषणा पत्र मिला था।

 

उन्होंने सोमवार को कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक की घोषणा के दौरान संवाददाताओं को बताया कि हमलावर को 36 मिनट में काबू में कर लिया गया।

एर्डर्न ने कहा कि जब तक पुलिस की योजना अमल में लाई जाती, उससे पहले ही 911 नंबर बज उठा, गोलीबारी हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि योजना को अमल में लाने के लिए बहुत कम गुंजाइश बची थी।  उन्होंने हर मृतक के परिवार की मदद का वादा किया।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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