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आंसर शीट में छात्र ने लिखा- पाक से बदला लेना है पास कर दीजिए, देखें यूपी बोर्ड स्टूडेंट्स के मजेदार जवाब

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लखनऊ। यूपी में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और कॉपियों की जांच का काम भी शुरू हो गया है। कॉपी चेंकिंग के दौरान छात्रों की कुछ ऐसे जवाब भी सामने आए हैं जिन्हें पढ़कर किसी की भी हंसी छूट जाएगी। आईए देखते हैं छात्रों ने अपने खुराफाती दिमाग लगाकर कॉपियों में कैसे जवाब लिखे हैं।

हाल ही कॉपी जांच के दौरान एक छात्र की कॉपी सामने आई जिसमें लिखा था, ‘सर, मेरे मामा सेना में थे, वह शहीद हो गए हैं, पाकिस्तान से उनका बदला लेने जाना है। इसलिए पास कर दीजिए।’ परीक्षा में पास होने के लिए छात्र अलग अलग तरह के हथकंडे अपनाते हैं।

वहीं बताया जा रहा है कि एक छात्र ने लिखा है, ‘गुरुजी पास कर दीजिए, वर्ना भगवान आपको कभी माफ नहीं करेगा’. साथ ही कई छात्र कॉपी में जवाब नहीं नहीं लिख पाए और उन्होंने जवाब की जगह प्रश्न ही लिख दिया. माना जा रहा है कि नकल पर लगाम लगने की वजह से कई छात्र बहुत कम सवाल के जवाब दे पाए।

बता दें कि पेपर की कॉपियों का हाल पिछले साल भी ऐसा ही था. पिछले साल भी एक कॉपी में लिखा था ‘मैं पूजा से प्यार करता हूं… ये मोहब्बत भी क्या चीज है… ना जीने देती है और ना ही मरने… सर इस लव स्टोरी ने पढ़ाई से दूर कर दिया वर्ना…’

बता दें कि पेपर की कॉपियों का हाल पिछले साल भी ऐसा ही था. पिछले साल भी एक कॉपी में लिखा था ‘मैं पूजा से प्यार करता हूं… ये मोहब्बत भी क्या चीज है… ना जीने देती है और ना ही मरने… सर इस लव स्टोरी ने पढ़ाई से दूर कर दिया वर्ना…’
एक कॉपी में लिखा था- ‘गुरुजी को कॉपी खोलने से पहले नमस्कार… गुरुजी पास कर दें. चिट्ठी तू जा सर के पास, सर की मर्जी फेल करें या पास…’

एक जवाब में लिखा था- ‘हाथ जोड़कर मैं आपके निवेदन करता हूं कि मुझे माफ कर दें. मैं गरीब परिवार से हूं और कपड़ों की सिलाई करके मैंने पैसे कमाए हैं. मेरे पास पढ़ने के लिए किताबें भी नहीं थीं. मुझे दूसरों की किताबों से पढ़ना पड़ता था. आपसे निवेदन की आप मुझे पास कर दें.’

एक कॉपी में लिखा था- ‘मैं एक गरीब परिवार से हूं और बहुत पहले मेरे पिता का निधन हो गया था. मुझे काम करना पड़ता था और अपने भाई-बहनों का ध्यान रखना पड़ा. मैं आपसे मुझे पास करने के लिए निवेदन करता हूं. ये मेरे और मेरे परिवार बहुत बड़ा अहसान होगा.’

 

वहीं हाल ही में एक मामला सामने आया था, जहां बच्चों ने उत्तर पुस्तिकाओं में नोट रखे हुए थे. कई कॉपियों में 500 रुपये के नोट भी मिले थे. यह घटना फिरोजाबाद की है. साथ ही कई कॉपियों में सुसाइड की धमकी भी दी गई थी और कई पुस्तिकाओं में बच्चों ने गाने या कई अन्य नोट लिखे हैं.

 

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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