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करतारपुर कारीडोर निर्माण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बहस जारी, जल्द ही सुनाएंगे फैसला

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करतारपुर कारीडोर निर्माण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित बैठक अटारी में शुरू हो चुकी हैं। यह बैठक अटारी-वाघा सीमा पर भारत की तरफ हो रही है। भारत की ओर से इस बैठक में  केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बीएसएफ, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण और पंजाब सरकार के अफसर शामिल है। 
इस परियोजना पर दोनों देशों द्वारा सहमति जताने के तीन महीने बाद यह बैठक हो रही है। यह कॉरिडोर पाकिस्तानी शहर करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारतीय पंजाब के गुरदासपुर जिले से जोड़ेगा। इस बैठक में करतारपुर कारीडोर निर्माण से जुड़े अहम फैसले लिए जाएंगे।
आपको बता दें,करतारपुर कॉरिडोर बनाने की घोषणा भारत और पाकिस्तान दोनों ने मिलकर की थी। इस कॉरिडोर का मकसद सिख श्रद्धालुओं के लिए गुरुनानक देव की पवित्र धरती तक पहुंच और आवाजाही को आसान बनाना है। भारत में इसका उद्घाटन 26 नवम्बर को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया था। भारत की ओर से इस कॉरिडोर को बनाने की घोषणा 22 नवम्बर को ही कर दी गई थी।
वहीँ पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 28 नवम्बर को किया गया था। प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसकी आधारशिला रखी थी। पाकिस्तान के लिए करतारपुर कॉरिडोर पर्यटन की असीम सम्भावनाएं खोल देगा।
करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन के लिए सिख श्रद्धालु अब भारत में डेरा बाबा नानक से इस कॉरिडोर के जरिए सीधे करतारपुर गुरुद्वारे तक जा सकेंगे। इस दौरान श्रद्धालु भारत और पाकिस्तान की ओर से अलग-अलग बनाए गए कॉरिडोर से होकर गुजरेंगे।
रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

उत्तराखंड

आपदा पीड़ित परिवारों को 4 लाख रुपए का मुआवजा देगी उत्तराखंड सरकार

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को उत्तरकाशी जनपद के आराकोट पहुंचकर गत रविवार को आई प्राकृतिक आपदा अतिवृष्टि के कारण आराकोट, माकुडी, टिकोची, किराणु, चीवां, बलावट, दुचाणु, डगोली, बरनाली, गोकुल, मौंडा गांव का स्थलीय और हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र आराकोट में दैवीय आपदा से पीड़ित लोगों से मिले और ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने आराकोट इंटर कालेज में बनाए गए बेस कैंम्प व दैवीय आपदा से हुए नुकसान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि आपदा में मारे गए परिजनों को दैवीय आपदा के मानकों के अनुसार शीघ्र मुआवजा राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक मृत के परिजनों को 4-4 लाख की धनराशि दी जाएगी। घायलों का ईलाज निःशुल्क सरकार के द्वारा किया जा रहा हैं। बेघर हुए लोगों के लिए ग्राम समाज की भूमि का चयन करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रभावित काश्तकारों की सेब,भूमि व भवनों के क्षति के आंकलन की रिर्पोट तैयार करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए। ताकि शीघ्र प्रभावित लोगों को मुआवजा राशि वितरण कराई जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की पशुहानि का मुआवजा भी आपदा मानकों के अनुरूप शीघ्र प्रभावित लोगों को दिया जाएगा।

उन्होंने भरोसा दिया कि इस दुख की घड़ी में सरकार पूर्ण रूप से प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित सभी गांवों में राशन,पानी, कपड़े, कंबल व आवश्यक दवाईयां आदि पर्याप्त मात्रा में हेली से पंहुचाया गया है तथा जिला प्रशासन लगातार कार्य कर रहा हैं।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि आपदा के कारण जानमाल का काफी नुकसान हुआ हैं। जिसमें सड़क,बिजली,पानी,सिचाई आदि जैसी सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई है। उन्होंने कहा कि यातायात को जल्द से सुचारू करना सरकार की प्राथमिकता है सड़क खुलने के साथ ही मुलभूत सुविधाओं को शीघ्र दुरूस्त कर लिया जाएगा।

 

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