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इस त्योहार को मनाने के लिए सबसे सामने लड़के-लड़कियां उतार देते हैं कपड़े, और फिर…!

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नई दिल्ली। वैसे तो आपने कई अजीबोगरीब त्योहारों के बारे में सुना होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे फेस्टिवल के बारे में बताएंगे जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे।

दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में कार्निवलस, फेस्टिवल्स का सीजन चल रहा है। ऐसे में दुनिया के कई देशों में मार्डी ग्रास फेस्टिवल की धूम मची हुई है।

मार्डी ग्रास फेस्टिवल से अमेरिकी स्टेट न्यू ओर्लियंस सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है। मार्डी ग्रास फेस्टिवल के कई नाम हैं जैसे श्रोव मंगलवार, कार्निवाल मंगलवार या पैनकेक मंगलवार। सिडनी में आयोजित हो रहे मार्डी ग्रास फेस्टिवल की शुरूआत दो मार्च से हो चुकी है। सिडनी की 41 वीं परेड में लगभग 200 झांकियां शामिल हैं।

यह फेस्टिवल पिकनिक, म्यूजिक और क्रेजी कॉस्ट्यूम्स के लिए मशहूर है। मार्डी ग्रास फेस्टिवल ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यू ऑरलियन्स, रियो डी जनेरियो और दुनिया भर के कार्निवल समारोहों से जुड़ा हुआ है।

इस फेस्टिवल में आपको कई अजीबोगरीब चीज़ें देखने को मिलेंगी। अलग-अलग देशों के लोग मार्डी ग्रास फेस्टिवल में गे और लेस्बियन झांकियां निकालते हैं तो वही दूसरी तरफ कुछ लोग सड़कों पर उतर खुलेआम अपने प्यार का इजहार करते हैं।

इस फेस्टिवल की एक ख़ास परंपरा हैं जिसके मुताबिक़ अगर कोई लड़का किसी लड़की के साथ रात बिताना चाहता है या फिर उससे अपने प्यार का इजहार करना चाहता है तो उसे रंग-बिरंगे मोतियों की माला लड़की को देनी होती है। यदि लड़की ने उसे स्वीकार कर लिया तो समझो बात पक्की।

इस फेस्टिवल की एक परंपरा यह भी है कि लड़कियां अपने टॉप उठाकर सबको ब्रेस्ट दिखाती हुई डांस करती हैं तो लड़के अपने सारे कपड़े उतारते हैं। मार्डी ग्रास फेस्टिवल को लेकर एक हॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है जिसे काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म का नाम भी मार्डी ग्रास ही था।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

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अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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