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35000 महिलाओं से संबंध बना चुके हैं इस देश के राष्ट्रपति, दिन में दो बार बदलते थे लड़कियां

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नई दिल्ली। आप सबने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति  फिदेल कास्त्रो का नाम तो सुना ही होगा। फिदेल कास्त्रो साल ने 1959 में हुई क्रांति में अमेरिकी पिट्ठू फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंका था जिसके बाद वो सत्ता में आ गए थे। उन्हें कम्युनिस्ट क्यूबा का जनक माना जाता था।

फिदेल कास्त्रो ब्रिटेन की महारानी और थाईलैंड के राजा के बाद दुनिया के तीसरे ऐसे राष्ट्राध्यक्ष थे, जिसने सबसे लंबे समय तक राज किया। वर्ष 1959 से 1976 तक वे क्यूबा के प्रधानमंत्री और वर्ष 1976 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे थे। 25 नवंबर, 2016 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था।

फिदेल कास्त्रो का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। ये रिकॉर्ड उन्होंने भाषण देकर बनाया था। 29 सितंबर, 1960 को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे 29 मिनट का भाषण दिया था। उनका 7 घंटे 10 मिनट का सबसे लंबा भाषण क्यूबा में वर्ष 1986 में रिकॉर्ड किया गया था। ये भाषण उन्होंने हवाना में कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के कार्यक्रम में दिया था।

आज हम आपको फिदेल कास्त्रो की ज़िन्दगी के उस पहलू से रूबरू करवाने वाले हैं जिसके बारे में जानकार आप दंग रह जाएंगे। फिदेल कास्त्रो का राजनैतिक सफर जितना रोमांचक था उतनी ही दिलचस्प उनकी निजी ज़िन्दगी भी थी। फिदेल काफी रंगीन मिज़ाज़ के थे।

फिदेल कास्त्रो ने 82 साल की उम्र तक 35000 महिलाओं से संबंध बनाए थे। इस बात का खुलासा उन पर बनी एक डॉक्युमेंट्री में किया गया है। न्यूयॉर्क पोस्ट ने एक अधिकारी के हवाले से कहा था कि वो रोजाना दिन में करीब दो महिलाओं के साथ संबंध बनाते थे। यह सिलसिला करीब चार दशकों से भी ज्यादा समय तक चला था।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

 

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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