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खुशखबरी: वैज्ञानिकों को मिला एड्स का इलाज, अब नहीं होगा कोई एचआईवी का शिकार!

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नई दिल्ली। जानलेवा और लाइलाज बिमारी एड्स से पीड़ित लोगो के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। ब्रिटेन में एचआईवी से पीड़ित एक व्यक्ति इस बीमारी से मुक्त होने वाला दूसरा व्यक्ति बन गया है।

लंदन में एक शख्स के स्टेम सेल प्रतिरोपण के बाद वह HIV संक्रमण से पूरी तरह मुक्त हो गया। डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है।

ये बोन मैरो स्टेम सेल्स जिसने डोनेट किए हैं, उसे दुर्लभ आनुवंशिक उत्परिवर्तन है, जो एचआईवी संक्रमण को दूर करता है।डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी को दूर करने की प्रक्रिया महंगी और जोखिम भरी है।

डोनर को ढूंढने में भी काफी परेशानी आती है। जिन लोगों में CCR5 म्यूटिलेशन होता है वो अधिकतर उत्तरी यूरोपीय वंश के होते हैं जिन्हें ढूंढना आसान नहीं होता हैं।

व्यक्ति का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम के सदस्य रविंद्र गुप्ता ने बताया कि इस व्यक्ति को साल 2003 में एचआईवी हो गया था। इसके बाद उसे 2012 में बल्ड कैंसर हो गया।

2016 में वह काफी बीमार था। जिसके बाद डॉक्टरों ने उसके सेल ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया। डोनर में जेनेटिक म्यूटिलेशन CCR5 डेल्टा 32 है, जो एचआईवी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

आपको बता दें, वर्तमान में दुनिया के 3.7 करोड़ लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। 1980 में इस बीमारी के शुरू होने के बाद से अब तक दुनिया के 3.5 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है।

हाल के सालों में वैज्ञानिकों द्वारा की गई खोज से भी डॉक्टरों को इतनी उपलब्धि मिली है। इस मामले से यह साबित होता हैं कि वैज्ञानिक एक दिन एचआईवी से होने वाले एड्स को समाप्त करने में सक्षम होंगे।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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