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Video: कोट-पैंट पहनकर भारत से निपटने निकला यह पाकिस्तानी, जमकर बन रहा मजाक

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान में की गयी एयर स्ट्राइक और फिर विंग कमांडर को सकुशल पाकिस्तान सेना की गिरफ्त से रिहा करवाने की वजह से पाकिस्तानी बौखला गए है। सोशल मीडिया पर ऐसे ही एक पागल और तिलमिलाए पाकिस्तानी नागरिक का वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है।

दरअसल वीडियो में पाकिस्तानी नागरिक कोट-पैंट पहने अपने एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में राइफल लेकर हिन्दुस्तान को ख़त्म करने के लिए तैयार खड़ा दिख रहा है। वीडियो में वह आदमी कहता नजर आ रहा है कि “वो बॉर्डर पर जा रहा है, हिंदुस्तान के लिए वो अकेला ही काफी,पाकिस्तान हमारी धरती है और हम अपनी धरती को दफा करना जानते हैं। हिंदुओं अपना-अपना सोच लो, मैं तुम लोगों को नेस्तानाबूद कर दूंगा।’

भारत को खत्म करने की धमकी देने वाले इस पाकिस्तानी नागरिक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। मीडिया पर लोगो ने उसका जमकर मजाक उड़ाया है। एक सोशल मीडिया यूजर ने तो यह तक लिख दिया कि”जंग पर जाने से पहले कपडे तो बदल लेते”।

यह कहना गलत नहीं होगा की भारत ने पुलवामा हमले का करारा जवाब देकर पाकिस्तानियों की नींदें उड़ा ली है। एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान के मन में भारत को लेकर खौफ बैठ गया है और अब वह अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए अजीबोगरीब कारनामे कर रहा है।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

 

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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