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500 सालों से इस शिव मंदिर की देखभाल कर रहा है मुस्लिम परिवार, वजह है हैरान करने वाली

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नई दिल्ली। भारत विविधता में एकता से परिपूर्ण देश है। यहां आए दिन सामाजिक सद्भाव के नए रूप देखने को मिलते हैं। असम के गुवाहाटी में हिन्दू -मुस्लिम एकता का एक नायाब उदाहरण देखने को मिला है। गुवाहाटी स्थित रंगमहल गांव में एक मुस्लिम परिवार बरसों से शिव मंदिर की देखरेख करता आ रहा है।

इस मंदिर में हिन्दू और मुस्लिम दोनों संप्रदाय के लोग अपनी श्रद्धा व्यक्त करते नज़र आते हैं। सब अपने कष्टों का निवारण करने के लिए यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं।

कई पीढ़ियों से शिव मंदिर की देखरेख करने वाले मतिबर रहमान बताते हैं, ‘यह मंदिर 500 साल पुराना है। हमारा परिवार इस मंदिर की देखभाल करता है। यहां सभी धर्मों के लोग प्रार्थना करने आते हैं।’ मदिर की ख्‍याति सुनकर दूर-दूर से यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई मुस्लिम परिवार किसी मंदिर की देखभाल कर रहा हो। पहले भी इस तरह की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। इसीलिए भारत को गंगा जमुनी तहजीब का देश कहा जाता है जहां अलग अलग संप्रदाय के लोग मिलजुलकर साथ रहते हैं।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

 

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वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा सके इस जलकुंड का रहस्य, ताली बजाते ही उबलने लगता है पानी

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पूरी दुनिया में कई ऐसे कुंड हैं जो वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं। ऐसा ही एक जलकुंड भारत में भी है जिसका रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं सका है। इस कुंड के रहस्य को जानकर आप दांतो तले उंगलिया दबा लेंगे। आईए जानते हैं इस कुंड के रहस्य के बारे में…

रहस्य से भरा ये कुंड झारखंड के बोकारो जिल में स्थित है। इसके बारे में कहा जाता है कि अगर आप कुंड के सामने ताली बजाएंगे तो पानी अपने आप ऊपर उठने लगता है।

देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों पानी उबल रहा हो। ऐसा क्योँ होता है इस बात का पता आज तक भू-वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए हैं।

इसे दलाही कुंड के नाम से जाना जाता है। यह कंक्रीट की दीवारों से घिरा हुआ है। कहते हैं कि इस कुंड में से गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म पानी निकलता है।

यह भी एक रहस्य ही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कुंड के नहाने वाले लोगों के चर्म रोग सही हो जाता है। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस कुंड के पानी से नहाने पर चर्म रोग दूर होते हैं तो इसका मतलब ये है कि इसमें गंधक और हीलियम गैस मिला हुआ है।

इस जगह पर हर साल मकर संक्रांति पर मेला लगता है। दूर-दूर से लोग यहां नहाने के लिए आते हैं। इस रहस्यमयी कुंड के पास ही दलाही गोसाईं नामक देवता का स्थान है, जहां हर रविवार को लोग पूजा करने के लिए आते हैं।

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