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आध्यात्म

भगवान विष्णु के ये दो अवतार आज भी हैं धरती पर जीवित, जानकर दंग रह जाएंगे आप

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नई दिल्ली। भगवान विष्णु के 10 अवतार हैं यही वजह है कि उन्हें दशावतार भी कहा जाता है। लेकिन आज हम आपको भगवान विष्णु से जुड़ी एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान विष्णु के 2 अवतार आज भी धरती पर मौजूद हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान विष्णु ने अब तक 23 अवतार लिए हैं इनमें जिन 10 अवतारों के बारे में हम जानते हैं वो भगवान विष्णु के मुख्य अवतार माने जाते हैं।

भगवान विष्णु के 23 अवतार तो अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके हैं, जबकि उनका 24वां अवतार ‘कल्कि अवतार’ के रूप में होना बाकी है। पुराणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे और देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और पुन: धर्म की स्थापना करेंगे।

संस्कृत का एक श्लोक है, “अश्वत्थामा बलिव्यासो हनूमांश्च विभीषिण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:।। सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेययाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपिसर्वव्याधि विवर्जित:।।” इसका अर्थ ये है कि अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और ऋषि मार्कण्डेय ये आठ लोग संसार में अमर हैं।

हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के दो अवतार धरती पर आज भी जीवित हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के 19वें अवतार हैं। वे महाज्ञानी महर्षि पराशर के घर पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। इन्होंने ही मनुष्यों की आयु और शक्ति को देखते हुए वेदों के विभाग किए थे, इसलिए इन्हें वेदव्यास कहा जाता है। पांडव महर्षि वेदव्यास की सलाह पर स्वर्ग की यात्रा की कोशिश की थी।

भगवान विष्णु का दूसरा अवतार जिसे आज भी धरती पर जीवित माना जाता है वो हैं परशुराम। परशुराम विष्णु जी के 18वें अवतार हैं।

इन्हें भगवान विष्णु का 18वां अवतार माना जाता है। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए परशुराम ने 21 बार धरती से क्षत्रिय को समाप्त कर दिया था।

आध्यात्म

रहस्यमई गुफा में आज भी मौजूद है भगवान गणेश का कटा सिर, यकीन न हो तो देख लीजिए तस्वीर!

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नई दिल्ली। भगवन श्री गणेश का कटा हुआ सिर आज भी इस धरती पर मौजूद हैं। ऐसी मान्यता हैं कि स्वयं शिव ने अपने पुत्र गणेश से क्रोधित होकर उनका सिर धड़ से अलग कर दिया था और उसे एक सुरक्षित गुफा में रख दिया था।

कलयुग में उस गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी। वह गुफा उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पाताल भुवनेश्वर में मौजूद गणेश जी की मूर्ति को आदि गणेश के नाम से जाना जाता है। लोगों का कहना है कि गणेश जी के कटे हुए सिर की रक्षा स्वयं महादेव करते हैं।

उस गुफा में भगवान गणेश के कटे शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दल ब्रह्मकमल के रूप की एक चट्टान है। इस ब्रह्मकमल से भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर दिव्य बूंद टपकती है। मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख में गिरती हुई दिखाई देती है। मान्यता है कि यह ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही वहां स्थापित किया था।

इस गुफा की ख़ास बात यह है कि यहां चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थर स्थापित हैं। कहा जाता है कि इनमें से जो पत्थर कलयुग का प्रतीक हैं वो धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा है जिस दिन वो पत्थर दीवार से टकरा जाएगा उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला

 

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