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शेर की तरह पिंजरे से निकले अभिनंदन, भारत की धरती पर रखा कदम, हर तरफ लग रहे थे हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे

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अभिनंदन

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान भार लौट आए हैं। उन्होंने कल रात 9 बजकर 21 मिनट पर देश की सीमा में प्रवेश किया। उसके बाद उन्हें अमृतसर ले जाया गया। अमृतसर के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया तबतक बहुत देर हो चुकी थी।अभिनंदन

इसके बाद उन्हें सेना के बेस हॉस्पिटल में लाया गया जहां उनका मेडिकल चेकअप किया गया। इस सब प्रक्रिया के बाद वो अपने परिवार वालों से मिले। बता दें कल से ही पाकिस्तान उन्हें भारत लाने में देरी कर रहा था।अभिनंदनपाकिस्तान की तरफ से अभिनंदन को रोकने की बहुत कोशिश की गई लेकिन वो नाकामयाब रहा। शुक्रवार सुबह से लेकर शाम तक पाक सिर्फ झूठ ही बोलता रहा।

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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